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9 वर्षीय अद्वैत भारतीय ने अफ्रीका के सबसे ऊँचे पर्वत माउंट किलिमंजारो पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की

पुणे के 9 वर्षीय अद्वैत भारतीय ने अफ्रीका के सबसे ऊँचे पर्वत माउंट किलिमंजारो पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की, गौरतलब है कि माउंट किलिमंजारो की ऊंचाई 19,341 फीट है। इससे अद्वैत मात्र 6 वर्ष की आयु में माउंट एवेरेस्ट के बेस कैंप तक गये थे। इसके बाद अद्वैत ने यूरोप के माउंट एलब्रुस पर चढ़ाई करने की योजना बनायी है।

माउंट किलिमंजारो

माउंट किलिमंजारो अफ्रीका का सबसे ऊँचा पर्वत है, इसकी उंचाई 19,341 फीट (5,895 मीटर) है। यह पर्वत तंज़ानिया में स्थित है। सर्वप्रथम 1889 में हंस मेयेर और लुडविग पुर्तशेलर इस पर्वत के शिखर पर पहुंचे थे।

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अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजली अर्पित की गयी

आज अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि  है, इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा अन्य गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजली अर्पित की। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त, 2018 को हुआ था। उन्हें भारतीय राजनीती के सर्वाधिक प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता है। राजनेता के साथ-साथ वे एक कवि भी थे।

अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मी बाई कॉलेज) से स्नातक की पढाई की। इसके बाद DAV कॉलेज कानपूर से उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में M.A. की डिग्री प्राप्त की। शुरू में आर्य समाज से जुड़े थे। 1939 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जुड़े और प्रचारक बने। अटल बिहारी वाजपेयी ने युवावस्था में ही स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने शुरू किया, भारत छोडो आन्दोलन में अटल बिहारी वाजपेयी और उनके बड़े भाई प्रेम को 23 दिनों के लिए कारागार में डाला गया था।

1977 के आम चुनावों में जनता पार्टी की जीत के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को मोरारजी देसाई के मंत्रीमंडल में विदेश मंत्री का पद दिया गया था। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था, वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति थे। 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवानी और भैरों सिंह शेखावत ने भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वे पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने, हालांकि उनका कार्यकाल केवल 13 दिन का था। दूसरी बार वे 1998 से 1999 के बीच 11 महीने के लिए प्रधानमंत्री बने। 1999 से 2004 के बीच वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। इसके अलावा वे मोरारजी देसाई की कैबिनेट में विदेश मंत्री भी रहे।

अटल बिहारी वाजपेयी लगभग 4 दशक तक भारतीय संसद के सदस्य थे, वे 10 बार लोकसभा के सदस्य तथा 2 बार राज्यसभा के सदस्य चुने गये। 2009 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से सक्रीय राजनीती से सन्यास लिया।

सम्मान 

2015 में अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनके जन्म दिवस 25 दिसम्बर को केंद्र सरकार ने 2014 में सुशासन दिवस घोषित किया था। वर्ष 1992 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। 1994 में उन्हें लोकमान्य तिलक अवार्ड प्रदान किया गया था। 1994 में ही उन्हें उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार दिया गया था। वर्ष 2015 में उन्हें बांग्लादेश सरकार द्वारा बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम सम्मान प्रदान किया था।

 

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