व्यक्तिविशेष करेंट अफेयर्स

बिज़नेसलाइन चेंजमेकर अवार्ड 2019

बिज़नेसलाइन चेंजमेकर अवार्ड 2019 के विजेताओं की सूची निम्नलिखित है :

चेंजमेकर ऑफ़ द इयर : सेक्शन 377 के विरुद्ध याचिकाकर्ता

चेंजमेकर ऑफ़ द इयर : GST परिषद्

आइकोनिक चेंजमेकर : बेजवाडा विल्सन (सफाई कर्मचारी आन्दोलन)

सामाजिक परिवर्तन : द कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज

डिजिटल परिवर्तन : eNAM (इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाज़ार)

यंग चेंजमेकर : अंजू वर्मा (वंचित वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा को बढ़ावा देना)

यंग चेंजमेकर : कुश और अर्जुन पाण्डेय (फुटबॉल में युवा टैलेंट की खोज के लिए ScoutMe एप्प के डेवलपर्स)

बिज़नेसलाइन चेंजमेकर अवार्ड्स

बिज़नेसलाइन चेंजमेकर अवार्ड्स का गठन 2018 में किया गया था, यह गठन द हिन्दू बिज़नेसलाइन के 25 वर्ष पूरा होने के अवसर पर किया गया था। इस पुरस्कार के द्वारा उन लोगों/संस्थाओं को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने अपने कार्य के द्वारा समाज, अर्थव्यवस्था तथा विश्व को बेहतर बनाने का प्रयास किया है।

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वैज्ञानिक नम्बी नारायणन को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नम्बी नारायणन को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा हाल ही में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पद्म भूषण भारत सरकार द्वारा प्रदान किया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा असैनिक सम्मान है।

नम्बी नारायणन को विकास इंजन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। विकास इंजन का उपयोग शुरूआती में PSLV (पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल) के लिए किया गया था। इस इंजन का उपयोग इसरो के चंद्रयान तथा मंगलयान मिशन के लिए भी किया जा चुका है। नम्बी नारायण इसरो के क्रायोजेनिक प्रोजेक्ट में कार्य कर रहे थे, तब 1994 में उन्हें जासूसी के झूठे आरोप में फसाया गया था। उन पर राकेट तथा सैटेलाइट लांच के गोपनीय डाटा को बेचने का आरोप लगाया गया था। उन्हें दिसम्बर, 1994 में गिरफ्तार किया गया तथा उन पर जासूसी का आरोप लगाया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें 1998 में निर्दोष घोषित करते हुए सभी दोषी से मुक्त किया। 2018 में उनके लिए क्षतिपूर्ती की घोषणा की गयी थी।

नम्बी नारायणन

नम्बी नारायणन का जन्म 12 दिसम्बर, 1941 में तमिलनाडु में हुआ था। वे एक एरोस्पेस इंजिनियर हैं। उन्हें जासूसी के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 1998 में उन्हें दोषमुक्त घोषित किया तथा 2018 में उनके लिए 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की घोषणा की गयी। सर्वोच्च न्यायालय ने केरल पुलिस के अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए जस्टिस डी.के. जैन की अध्यक्षता में समिति का गठन भी किया था।

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