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कलकत्ता में किया गया भारतीय नौसेना के सेवा चयन बोर्ड (SSB) का उद्घाटन

हाल ही में भारतीय नौसेना के सेवा चयन बोर्ड का उद्घाटन नेवी चीफ एडमिरल सुनील लांबा ने कलकत्ता के निकट डायमंड हारबर में किया। इस सेवा चयन बोर्ड से नौसेना में महिला व पुरुषों को शामिल करने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा। इस बोर्ड के कलकत्ता में स्थापित किये जाने के बाद उत्तर-पूर्व तथा पूर्वी भारत के उम्मीदवारों को नौसेना में शामिल होने के लिए अधिक यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। यह भातीय नौसेना का पांचवा सेवा चयन बोर्ड है। इसके द्वारा स्थायी तथा शार्ट सर्विस कमीशन ऑफिसर दोनों का चयन किया जायेगा। भारतीय नौसेना के अन्य सेवा चयन बोर्ड भोपाल, बंगलुरु, विशाखापत्तनम तथा कोइम्बटोर में स्थित है। इस बोर्ड में एक साथ 160 उम्मीदवारों का परीक्षण किया जा सकता है।

भारतीय नौसेना

देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा का भार भारतीय नौसेना पर है। वर्तमान में भारतीय नौसेना में 67,228 सैनिक/कर्मचारी कार्यरत्त हैं। भारतीय नौसेना की स्थापना 1612 ईसवी में हुई थी। महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी को भारतीय नौसेना का पिता कहा जाता है।भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य “शं नो वरुणः” है।

मार्च 2018 के अनुसार भारतीय नौसेना के पास एक एयरक्राफ्ट कैरिएर, 1 उभयचर परिवहन डॉक, 8 लैंडिंग शिप टैंक, 11 डिस्ट्रॉयर, 13 फ्रिगेट, 1 परमाणु उर्जा संचालित पनडुब्बी, 1 बैलिस्टिक मिसाइल युक्त पनडुब्बी, 14 परंपरागत पनडुब्बीयां, 22 कार्वेट, 4 फ्लीट टैंकर तथा अन्य कई पोत हैं।

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सीमा सड़क संगठन ने किया भारत के प्रथम प्राकृतिक आइस कैफ़े का निर्माण

भारत का पहला प्राकृतिक आइस कैफ़े लद्दाख के लेह में 14,000 फीट की ऊंचाई पर शुरू हो गया है। यह आइस कैफ़े मनाली-लेह हाईवे पर स्थित है। इसका निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा किया गया है। इसका उद्देश्य शीतकाल में पानी की बचत करना तथा बाद में आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकता है। इस कैफ़े को सोनम वांगचुक के बर्फीले स्तूप की भांति तैयार किया गया है। यह पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है।

बर्फीले स्तूप

  • बर्फीले स्तूप एक किस्म के कृत्रिम ग्लेशियर हैं, यह ग्लेशियर शीतकाल जम जाने के कारण जल का संरक्षण करते हैं।
  • यह कृत्रिम ग्लेशियर बसंत ऋतू में पिघलते हैं, इस दौरान खेतों में इस जल की आवश्यकता भी होती है।
  • लेह शीत मरुस्थल क्षेत्र में आता है, यहाँ अधिकतर गाँव जल की कमी की समस्या से जूझते हैं, विशेषतः अप्रैल और मई में पानी की समस्या काफी अधिक होती है। जबकि जुलाई में बर्फ के पिघलने के कारण फ़्लैश फ्लड जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • सितम्बर तक कृषि सम्बन्धी सभी गतिविधियाँ पूरी हो जाती हैं और शीतकाल में छोटी-छोटी धाराओं में जल व्यर्थ होकर सिन्धु नदी में बहता जाता है।
  • इस समस्या को देखते हुए बर्फीले स्तूप का विचार उत्पन्न हुआ, इसके द्वारा शीतकाल में व्यर्थ बहने वाले जल को बर्फ के पहाड़ के रूप में स्टोर करने की योजना बनायीं गयी, बाद में जब खेतों में जल की आवश्यकता होती है तब इस जल का उपयोग किया जा सकता है।
  • बर्फीले स्तूप का उद्देश्य क्षेत्र में जल की समस्या का समाधान करना है।

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