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आंध्र प्रदेश ने नए राजकीय प्रतीकों को सूचित किया

आंध्र प्रदेश सरकार ने आंध्र प्रदेश के विभाजन के चार वर्ष बाद अपने नए राज्य प्रतीकों को अधिसूचित किया, वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश को दो भागो में (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) विभाजित किया गया था. इन प्रतीकों को पर्यावरण, वन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अधिसूचित किया गया है. नये राजकीय प्रतीकों की घोषणा में राजकीय पक्षी, राजकीय पशु,राजकीय वृक्ष और राजकीय फूल के नाम घोषित किये गये. सरकारी आदेशो के अनुसार राजकीय प्रतीकों में विभाजन के बाद राज्य की पृथक पहचान के लिए नए राजकीय प्रतीकों को सूचित करना आवश्यक है.

आंध्र प्रदेश के राजकीय प्रतीक

  • राजकीय पक्षी: गुलाब-रिंग वाले पैराकेट (Psittacula krameri) जो कि स्थानीय भाषा में रामा चिलुका के नाम से जाना जाता है.
  • राजकीय वृक्ष: नीम (Azadirachta indica), स्थानीय भाषा में नाम – वेपा चेट्टू.
  • राजकीय पशु:  ब्लैक बक (Antilope cervicapra), स्थानीय भाषा में कृष्णा जिंका के नाम से जाना जाता है.
  • राजकीय फूल: जैस्मीन (jasminnum officinale).

चमेली को राजकीय फूल के रूप मे अपनाना इसकी उन्नति सुनिश्चित करना है, जो वाणिज्यिक रूप से गुंटूर, प्रकाशम, कुरनूल, कदप्पा, अनंतपुर और चित्तूर जिलों में उगाया जाता है.

तेलंगाना के राजकीय प्रतीक

  • राजकीय पक्षी: इंडियन रोलर (coracias benghalensis) या पलापित्ता. यह ओडिशा और कर्नाटक का राजकीय पक्षी भी है.
  • राजकीय वृक्ष: जम्मी चेट्टू (prosopis cineraria)
  • राजकीय पशु : जिंका अथवा स्पॉटेड हिरन.
  • राजकीय फूल: तंगीडी पुव्वु (senna auriculata). इसका व्यापक रूप से राज्य के प्रसिद्ध बठुकम्मा त्यौहार में उपयोग किया जाता है.

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गारो हिल्स में गज यात्रा का  शुभारंभ

28 मई, 2018 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने मेघालय की गारो हिल्स में स्थित तुरा शहर से हाथियों की रक्षा के लिए एक जागरूकता अभियान ‘गज यात्रा’ शुरू किया. यह वन विभाग के सहयोग से भारत के वन्यजीवन ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया है. इस अभियान के तहत, लोगों के बीच हाथियों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए उन जिलों में हाथी का शुभंकर लेकर अभियान चलाया जाएगा जिनसे होकर हाथियों का झुंड गुजरता है.

गज यात्रा

गज यात्रा 18 महीने लंबा एक राष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य 12 राज्यों में भारत के राष्ट्रीय विरासत पशु हाथियों की रक्षा करना है. यह अभियान विश्व हाथी दिवस 2017 (12 अगस्त को मनाया गया) के अवसर पर पर्यावरण और वन मंत्री हर्षवर्धन द्वारा अगस्त 2017 में लॉन्च किया गया था. अभियान का नेतृत्व वन्यजीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) द्वारा किया जा रहा है. इसका उद्देश्य हाथियों के संरक्षण में जीवन के सभी क्षेत्रों से लोगों को शामिल करना है. इस अभियान के तहत, केंद्र सरकार की हाथी परियोजना, राज्य वन विभागों और विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी में, डब्ल्यूटीआई 12 हाथी रेंज राज्यों में 101 हाथी गलियारों को सुरक्षित कर रहा है.

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