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मानस नेशनल पार्क में दो दिवसीय असम स्प्रिंग महोत्सव आयोजित किया गया

मानस नेशनल पार्क में दो दिवसीय असम स्प्रिंग महोत्सव आयोजित किया गया । यह भारतीय वेवर्स एसोसिएशन और स्वंकर मिठाईंग ओन्साई अफत द्वारा आयोजित किया गया था, जो मानस में शिकारियों का एक संगठन हैं जो अब वन्यजीव संरक्षण में लगा हुआ है ।

मुख्य तथ्य

o इस महोत्सव का उद्देश्य सुदूर ग्राम वाशियों के स्थानीय भोजन और संस्कृति को बढ़ावा देना है।
o इस महोत्सव ने खाद्य, हथकरघा और संस्कृति के माध्यम से वैकल्पिक आजीविका का मॉडल बनाने का भी प्रयास किया।
o इस महोत्सव में ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय हस्तकला ,हथकरघा का प्रदर्शन, सांस्कृतिक शोकेस, स्थानीय लोक संगीत , स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेना आदि शामिल थे।
o इसमें 300 से अधिक घरेलू और विदेशी पर्यटकों की भागीदारी देखी गई।

मानस राष्ट्रीय उद्यान भारत का प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान हैं। असम मे यह उद्यान स्थित हैं। एक सींग वाले गैंडे और बारहसिंघा के लिए विशेष रूप से यह उद्यान प्रसिद्ध है। यहाँ स्तनधारीयों की 55 प्रजातियां, पक्षियों की 380 प्रजातियां, सरीसृपों की 50 और उभयचर की 3 प्रजातियां पाई जाती हैं। यहाँ के अन्य प्राणियों में भारतीय हाथी, भारतीय गैंडे, गौरा, एशियाई जल भैंस, बारासिंगा, भारतीय बाघ, भारतीय तेंदुओं, एशियाई स्वर्ण बिल्ली, ढोल, टोपी वाले लंगूर, स्वर्ण लंगूर, सांभर हिरण और चीतल इत्यादि शामिल हैं।

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भारत सरकार द्वारा हरियाणा से राष्ट्रीय स्तर पर गोवर्धन योजना शुरू की जाएगी

ठोस कचरे एवं जानवरों के मलमूत्र से खाद तथा बायोगैस ईंधन बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नई योजना ‘गोबर धन योजना’ बनाई है, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर शुरूआत 30 अप्रैल, 2018 को हरियाणा के करनाल से की जानी प्रस्तावित है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांव की स्वच्छता व गोबर से बायोगैस ऊर्जा का उत्पादन करना है।

मुख्य तथ्य

o विश्व में सर्वाधिक 300 मिलियन पशुओं की संख्या भारत में है, जिनसे प्रतिदिन 3 मिलियन मलमूत्र अथवा गोबर मिलता है। कुछ यूरोपियन देश और चीन ने पशुओं से प्राप्त गोबर का सदुपयोग करके बायोगैस जैसी ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया है। इसी अवधारणा को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में गेल्वैनिक ऑर्गेनिक बायो एग्रो रिसोर्सिज़ (गोबर धन) बनाने की बात कही थी।
o गत फरवरी मास में केन्द्रीय बजट मेें वित्त मंत्री ने इस योजना के लिए बजट में किए गए प्रावधान की चर्चा भी की थी, हमारे देश में किसान की आय पूरी तरह फसल पर निर्भर करती है। इसलिए यह योजना किसानों की आय बढ़ाने में काफी हद तक मददगार होगी।
o गोबर से बेहतर कम्पोस्ट खाद भी बन पाएगी। प्राप्त बायो ऊर्जा से जहां एक ओर बिजली बचाई जा सकेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रो मेंं रहने वाले लोगों को धुएं वाले ईंधन से छुटकारा मिलेगा।
o देश के हर जिले का एक-एक गांव का चयन किया जाएगा। हरियाणा से इसकी शुरुआत करने के लिए करनाल के कुंजपुरा का चयन किया जा रहा है।

o इस योजना में ग्राम पंचायत की भूमिका अहम है। गोबर से बायोगैस प्लांट व्यक्तिगत, सामुदायिक, सैल्फ हैल्प ग्रुप, या गऊशाला जैसे एन.जी.ओ. के स्तर पर स्थापित किए जा सकते हैं। प्लांट के लिए टैक्नीकल एक्सपर्ट की सहायता ली जाएगी। इसके लिए भारत सरकार और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात से धनराशि उपलब्ध करवाएगी, जो गांव में हाऊस होल्ड की संख्या पर आधारित होगी।
o चालू वित्त वर्ष में योजना के तहत 700 जिले कवर किए जाएंगे। मंत्रालय से आई कंसल्टेंट कुमारी सिरेशा ने गोबर धन योजना पर प्रेजेन्टेशन दी, जिसमें विभिन्न मॉडल दिखाए गए।

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