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सीआरपीएफ ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का मुकाबला करने हेतु 241 बस्तरिया बटालियन नामक विशेष इकाई शुरू की

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए बस्तरिया बटालियन (241 नंबर) नामक विशेष इकाई शुरू की है। यह पहली बार है जब सीआरएफपी ने विशेष बटालियन को शामिल किया है जिसमें बस्तर जिले के नक्सल प्रभावित इलाके में लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने हेतु स्थानीय प्रतिनिधित्व शामिल है।

241 बस्तरिया बटालियन

241 बस्तरिया बटालियन में छत्तीसगढ़ के चार अत्यधिक नक्सल प्रभावित जिले, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुक्मा से चुने गए 198 महिलाओं (सरकारी नीति के अनुसार 33% महिला उम्मीदवार) सहित कुल 739 स्थानीय जनजातीय युवा शामिल हैं। इन्हें नक्सलियों के खिलाफ लड़ने के लिए छत्तीसगढ़ के विशेष ऑपरेशन जोन (एसओजेड) में तैनात किया जाएगा।

इस बटालियन को बढ़ाने के लिए, सीआरपीएफ ने 743 ग्रामीण एसटी उम्मीदवारों की भर्ती हेतु विशेष भर्ती अभियान चलाया था। इसने राज्य प्रशासन के साथ समन्वय कर अधिकतम भागीदारी और समान अवसर (maximum participation and equal opportunities) सुनिश्चित करने हेतु भर्ती अभियान के दौरान पूर्व-शैक्षणिक तथा शारीरिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया ।

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निफा वायरस:केरल राज्य को संक्रमण से बचाव हेतु हाई अलर्ट पर रखा गया

केरल को ‘निफा वायरस’ की पुष्टि के बाद हाई अलर्ट पर रखा गया है केरल के कोझीकोड ज़िले में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। केरल के तटीय कोझिकोड क्षेत्र में वायरल बुखार से मरने वाले दो व्यक्तियों के रक्त और शरीर के तरल नमूने में इसका निशान पाया गया। केरल सरकार द्वारा कोझीकोड में होने वाली मौतों के लिये ज़िम्मेदार कारक के रूप में ‘निफा वायरस’ की पुष्टि की गई है। पुणे विरोलॉजी इंस्टीट्यूट द्वारा निफा वायरस की पुष्टि की गई है। इस मामले में अधिक सटीक एवं प्रभावी जाँच-पड़ताल के लिये इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा एक समिति का गठन किया गया है।

निफा वायरस

निपा वायरस (एनआईवी) संक्रमण ज़ूनोटिक बीमारी है यह वायरस इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी प्रभावित करता है। यह वायरस फ्रूट बैट्स के माध्यम से इंसानों और जानवरों पर आक्रमण करता है।
मलेशिया के कांपुंग सुंगई निफा में वर्ष 1998 में पहली बार इस वायरस के मामले नज़र आए थे। वर्ष 2004 में बांग्लादेश में भी इसके मामले सामने आए थे।एनआईवी संक्रमण तीव्र श्वसन सिंड्रोम, सांस लेने में परेशानी, मस्तिष्क की सूजन, बुखार, सिरदर्द, घबराहट तथा भ्रम का कारण बन सकता है। रोगी 48 घंटे के भीतर कोमा में जा सकता है। इसके साथ संक्रमित मरीजों की मृत्यु दर 70% है। यह घरेलू जानवरों से बीमारियों को उत्पन्न करने में सक्षम है।
खजूर की खेती करने वाले लोग फ्रूट बैट्स की चपेट में आ जाते हैं। इसके बाद एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इस वायरस का प्रसार होता है।
इस वायरस की चपेट में आने के बाद व्यक्ति को साँस लेने में परेशानी होती है, जिसके बाद वह इंसेफ्लाइटिस से ग्रसित हो जाता है।

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