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केरल और मिज़ोरम 100 फीसदी खुले में शौच मुक्त वाले राज्य बने

केरल और मिज़ोरम एक सरकारी-कमीशन सर्वेक्षण द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार 100 फीसदी खुले में शौच मुक्त (open defecation free) वाले राज्य बन गए हैं। जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार इस रैंकिंग में सबसे नीचे हैं। इन दोनों राज्यों में केवल 44 फीसदी घर ही खुले में शौच मुक्त हैं।
सर्वेक्षण का संपूर्ण कार्य कंप्यूटर सहायतित व्यक्तिगत साक्षात्कार नामक प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपादित किया गया। स्वतंत्र सर्वेक्षण एजेंसी द्वारा इस सर्वेक्षण के परिणाम राष्ट्रीय वार्षिक ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रबंधन हेतु गठित एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप के समक्ष प्रस्तुत किये गए। एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप में विश्व बैंक, यूनिसेफ, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, इंडिया सैनिटेशन कोअलिशन, सुलभ इंटरनेशनल, नॉलेज लिंक्स समेत नीति आयोग एवं सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सदस्य हैं।

मुख्य तथ्य

-भारत के साठ फीसदी ग्रामीण परिवारों ने राष्ट्रीय वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार इस बात को स्वीकार किया है कि आवश्यकता पड़ने पर उनके सभी सदस्य शौचालय का इस्तेमाल करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे खुले में शौच नहीं करते हैं।
-स्वच्छ भारत अभियान के शुभारंभ के साढ़े तीन साल बाद राष्ट्रीय वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण द्वारा ये आँकड़े प्रस्तुत किये गए। सर्वेक्षण के अनंतिम सारांश रिपोर्ट में यह पाया गया कि सभी ग्रामीण परिवारों में से तकरीबन 77 फीसदी परिवारों तक शौचालय की पहुँच सुनिश्चित की जा चुकी है। साथ ही इनमें से लगभग 93.4 फीसदी लोगों द्वारा नियमित रूप से शौचालय का उपयोग किया जा रहा है।
-पूरे देश में लगभग 68 फीसदी घर इस मानदंड पर खरे उतरते हैं।

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संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम उत्तर प्रदेश में पारित

राज्य विधानसभा में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की तर्ज पर माफिया और संगठित अपराध से निपटने के कड़े प्रावधान वाला उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2017 (यूपीकोका) पेश किया गया। आतंक फैलाने, बलपूर्वक या हिंसा द्वारा सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयास करने वालों से सख्ती से निपटने की यह विधेयक व्यवस्था प्रदान करता है। राज्यपाल और केंद्र की अनुमति मिलते ही यह कानून प्रभावी हो जाएगा।

पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री योगी द्वारा विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक , 2017 को पेश करते हुए बताया गया कि 21 दिसंबर, 2017 को विधानसभा में पारित होने के पश्चात् स्वीकृति के लिये विधेयक को विधानपरिषद के पास भेजा गया। परंतु, बिना किसी संशोधन के इसे अस्वीकार कर दिया गया।

प्रमुख विशेषताएँ

-विधेयक के उद्देश्य और कारणों में स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा कानूनी ढाँचा संगठित अपराध के खतरे के निवारण एवं नियंत्रण में अपर्याप्त पाया गया है।
-इसी कारण से संगठित अपराध के खतरे को नियंत्रित करने के लिये रिमांड की प्रक्रिया, संपत्ति की कुर्की, अपराध नियंत्रण प्रक्रिया, त्वरित विचार एवं न्याय के उद्देश्य के साथ यह विधेयक लाया गया है।
-विशेष न्यायालयों के गठन और विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की भी विधेयक में व्यवस्था की गई है।
-अपराध के खतरे को नियंत्रित करने हेतु इसके अंतर्गत संगठित आवश्यक अनुसंधान संबंधी प्रक्रियाओं को कड़े एवं निवारक प्रावधानों के साथ लागू करने के लिये विशेष कानून अधिनियमित करने का भी निश्चय किया गया है।
-संगठित अपराध के लिये विधेयक में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।
-आतंक फैलाने या बलपूर्वक, हिंसा द्वारा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिये विस्फोटकों या अन्य हिंसात्मक साधनों का प्रयोग कर किसी की जान या संपत्ति को नष्ट करने या राष्ट्र विरोधी, अन्य लोक प्राधिकारी को मौत की धमकी देकर या बर्बाद कर देने की धमकी देकर फिरौती के लिये बाध्य करने को लेकर इसके तहत कड़े प्रावधान किये गए हैं।
-अभी तक होता था कि पुलिस सबसे पहले किसी अपराधी को पकड़कर उसे कोर्ट में पेश करती था, फिर सबूत जुटाती थी। लेकिन उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक के तहत सबसे पहले पुलिस अपराधियों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करेगी, फिर उन सबूतों के आधार पर ही गिरफ्तारी होगी। अर्थात् अब अपराधी को कोर्ट में ही अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी।
-उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक की सबसे खास बात यह है कि इसमें गवाहों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है।
-उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक के तहत अब आरोपी यह नहीं जान पायेंगे कि उनके खिलाफ किसने गवाही दी है। सभी बातों को पूर्ण रूप से गोपनीय रखा जाएगा।

संगठित अपराध

उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक में संगठित अपराध को विस्तार से परिभाषित किया गया है। सरकारी ठेके में शक्ति प्रदर्शन, फिरौती के लिये अपहरण,खाली या विवादित सरकारी भूमि अथवा भवन पर जाली दस्तावेज़ें के ज़रिये या बलपूर्वक कब्जे, बाज़ार और फुटपाथ विक्रेताओं से अवैध वसूली, धमकी या वन्यजीव व्यापार, धन की हेराफेरी, मानव तस्करी, शक्ति का प्रयोग कर अवैध खनन,नकली दवाओं या अवैध शराब के कारोबार, मादक द्रव्यों की तस्करी आदि को इसके अंतर्गत शामिल किया गया है।

सज़ा

संगठित अपराध के परिणामस्वरुप विधेयक के अंतर्गत किसी की मौत होने की स्थिति में मृत्युदंड या आजीवन कारावास की व्यवस्था की गई है। न्यूनतम 25 लाख रुपए के अर्थदंड का भी प्रावधान किया गया है।
कम-से-कम 7 साल के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तथा न्यूनतम 15 लाख रुपए के अर्थदंड का प्रावधान किसी अन्य मामले में किया गया है।

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