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महाराष्ट्र सरकार ने पॉलिथिन पर प्रतिबंध लगाया |

महाराष्ट्र सरकार ने पॉलिथिन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है । मुख्‍यमंत्री फडनवीस की कैबिनेट के इस फैसले के बाद राज्य में 18 मार्च से पॉलिथिन के इस्तेमाल पर बैन लग जाएगा । इसमें पॉलिथिन की थैलियों और पॉलिथिन की चीजों पर बैन होगा ।

प्रतिबन्ध से जुडी मुख्य बातें

-इनका उत्पादन और बिक्री करने वालों पर 25 हजार रुपये तक जुर्माने के साथ 3 महीने की सजा का भी प्रावधान है। इस प्रतिबंध में पीईटी बोतलें और कचरे के डब्बे में इस्तेमाल होने वाली थैलियों को शामिल नहीं किया गया है लेकिन डिस्पोजल प्लास्टिक कप, प्लेट, चम्मच और प्लास्टिक थैलियों को शामिल किया गया है। दोबारा उपयोग में आने वाले प्लास्टिक का उपयोग दूध तथा डेयरी उत्पादों की पैकिंग में किया जा सकेगा।
-यह प्रतिबंध 18 मार्च गुड़ी पड़वा से लागू होगा। सरकार कारोबारियों को 31 मार्च तक की छूट देगी जिससे उन्हें तैयारी करने का समय मिल जाएगा। यह नियम महीने के अंत से पूरी तरह लागू हो जाएगे। पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने विधानसभा में बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने पर्यावरण विभाग के प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
-इसमें प्लास्टिक की थैलियां, थर्माेकोल और प्लास्टिक के प्लेट, कप, कटोरे, ग्लास, चम्मच, स्ट्रा, कटलरी और प्लास्टिक पाउच आएंगे। राज्य में इनकी बिक्री, इस्तेमाल, वितरण, उत्पादन और आयात पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है।
-कृषि उत्पादों ,विशेष आर्थिक क्षेत्र और दवाओं में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक थैलियां या दूसरे उत्पादों के लिए 50 माइक्रोन से ज्यादा मोटी प्लास्टिक का उपयोग करना होगा। पुनर्खरीदारी की व्यवस्था को अपनाना होगा।
-दूध या कृषि उत्पादों की पैकिंग के ऊपर पुनर्खरीदारी की कीमत लिखनी होगा। दूध वितरण करने वाली कंपनियों और डेयरी फर्मों को पुनर्खरीदारी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

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बलात्कार जैसे अपराधों को रोकने के लिए दण्ड विधि (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2018 हुआ पारित

हरियाणा विधानसभा में दण्ड विधि (हरियाणा संशोधन) विधेयक को पारित किया गया जिसमें 12 वर्ष या उससे कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों को फांसी देने की सजा का प्रावधान किया गया है. मध्यप्रदेश और राजस्थान के बाद हरियाणा तीसरा राज्य बन गया है जहां विधानसभा ने यौन अपराधों के दोषियों के लिए मौत की सजा के प्रावधान को स्वीकृति दी है. अपराध कानून( हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2018 को संसदीय कार्य मंत्री राम बिलास शर्मा द्वारा सदन में पेश किया गया.किरण चौधरी ने पीड़ितों की उम्र का विचार किए बिना बलात्कार के सभी दोषियों के लिए फांसी की सजा और कड़ी सजा के प्रावधानों का सुझाव दिया.

धारा 376- एए को जोड़ा गया

विधेयक में “ दंड संहिता की धारा 376- ए के बाद धारा 376- एए को जोड़ा गया. ” धारा 376- एए के तहत 12 साल तक की बच्चियों से बलात्कार के मामले में फांसी की सजा या न्यूनतम 14 साल सश्रम कैद की सजा होगी जिसे बढ़ाकर उम्रकैद किया जा सकता है. दंड संहिता की धारा 376- डी के बाद धारा376 – डीए को भी जोड़ा गया है. धारा 376- डीए के तहत 12 साल तक की बच्ची से सामूहिक बलात्कार होता है तो समूह में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को बलात्कार का दोषी माना जाएगा और फांसी की सजा या न्यूनतम 20 वर्ष की सश्रम कैद दी जाएगी लेकिन इसे उम्रकैद में बदला जा सकता है. जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

मौजूदा कानून भी ज्यादा सख्त

विधेयक में अन्य यौन अपराधों से जुड़े मौजूदा कानूनों को भी ज्यादा सख्त करने का प्रावधान किया गया है. भारतीय दंड संहिता( आईपीसी) की धारा354 ( स्त्री का शील भंग करने के आशय से उसके खिलाफ हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत न्यूनतम सजा दो साल होगी( पहले न्यूनतम सजा एक वर्ष थी) लेकिन इसे सात साल के लिए बढ़ाया जा सकता है( पहले पांच साल तक बढ़ाया जा सकता था).

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