विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

इसरो ने लांच किया RISAT-2B सैटेलाइट

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) ने आज  राडार इमेजिंग सैटेलाइट “RISAT 2B” को लांच किया। पहले इस सैटेलाइट को 2020 में RISAT-2A के बाद लांच करने की योजना थी। यह उपग्रह दिन तथा रात में पृथ्वी के हाई रेजोल्यूशन चित्र ले सकता है। यह उपग्रह आसमान में बादल होने के बावजूद भी चित्र ले सकता है। यह एक जासूसी उपग्रह है, यह भारत की सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है। इसके द्वारा पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के कैंप पर नजर रखी जा सकती है।

मुख्य बिंदु

  • इस उपग्रह को PSLV-C46 द्वारा लांच किया जाएगा, यह PSLV राकेट का रीयूज़ेबल संस्करण है।
  • इस उपग्रह को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र से लांच किया जाएगा।

RISAT श्रृंखला

20 अप्रैल, 2009 को RISAT-2 को कक्षा में स्थापित किया गया था। इसके बाद RISAT-1 को 26 अप्रैल, 2012 को लांच किया गया था, इसे पांच वर्ष के लिए प्रक्षेपित किया गया था। इसे PSLV-C19 द्वारा 536 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया था।

महत्व

RISAT उपग्रह पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह हैं, यह सभी प्रकार के मौसम में अपना कार्य कर सकते हैं। यह उपग्रह निगरानी के लिए सिंथेटिक अपर्चर राडार (SAR) का उपयोग करते हैं। यह उपग्रह दिन और रात में काम कर सकते हैं, इसके द्वारा ख़राब मौसम में भी निगरानी की जा सकती है। सीमा पर घुसपैठ पर नज़र बनाये रखने के लिए यह उपग्रह सेना के लिए काफी उपयोगी है।

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नासा को अल्टिमा थ्यूल पर जल के साक्ष्य प्राप्त हुए

नासा को हाल ही में अल्टिमा थ्यूल नामक ट्रांस-नेच्युनियन ऑब्जेक्ट पर जल के साक्ष्य मिले हैं। यह जल बर्फ, मेथनॉल तथा आर्गेनिक मॉलिक्यूल का मिश्रण है। यह ऑब्जेक्ट कुइपर बेल्ट में स्थित है। यह कुइपर बेल्ट के शोध में एक नया मील का पत्थर सिद्ध होगा।

अल्टिमा थ्यूल

• अल्टिमा थ्यूल में लाल रंग के दो बड़े हिस्से एक पतले से भाग से जुड़े हुए हैं।
• अल्टिमा थ्यूल पृथ्वी से 4 अरब मील (6.4 अरब किलोमीटर) दूर है।
• अल्टिमा थ्यूल एक प्रोपेलर की भाँती घूम रहा है।

न्यू होराइजन मिशन

• न्यू होराइजन मिशन एक अंतर्ग्रहीय मिशन है, यह नासा के न्यू फ्रंटियर्स कार्यक्रम का हिस्सा है। इस कार्यक्रम को वर्ष 2006 में लांच किया गया था।
• इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य 2015 में प्लूटो सिस्टम के अध्ययन के लिए इसके निकट उड़ान (फ्लाईबाय) भरना था।
• इस कार्यक्रम का द्वितीय मिशन कुइपर बेल्ट के एक या एक से अधिक बोजेक्ट के निकट उड़ान भरना था।
• न्यू होराइजन मिशन का उद्देश्य हमारे सौर मंडल के दूरस्थ किनारे के बारे में जानकारी प्राप्त करना है। कुइपर बेल्ट काफी हद तक रहस्यमय क्षेत्र है, इसके बारे में अधिक जानकारी मौजूद नहीं है।

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