विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

रुहदार: आईआईटी बॉम्बे द्वारा विकसित किया गया कम लागत वाला मैकेनिकल वेंटीलेटर

IIT बॉम्बे और इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, NIT श्रीनगर के छात्रों ने “रुहदार” नामक एक कम लागत वाले वेंटिलेटर का आविष्कार किया है।

रूहदार

एक वेंटिलेटर के उत्पादन की लागत लगभग 10,000 रुपये है। इस डिजाइन की शुरुआत कश्मीर से आईआईटी बॉम्बे के प्रथम वर्ष के छात्र ने की थी। उन्होंने वेंटिलेटर डिजाइन करना तब शुरू किया, जब उन्हें ज्ञात हुआ कि उनके गृह क्षेत्र कश्मीर घाटी में केवल 97 वेंटिलेटर हैं।

देश में वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाने के लिए भारत सरकार दो-आयामी दृष्टिकोण लागू कर रही है, वेंटिलेटर का घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आपूर्ति प्राप्त करना। दूसरा विकल्प चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सभी देशों में वेंटिलेटर की मांग काफी अधिक है।

केंद्र सरकार ने भी देश में नौ निर्माताओं की पहचान की है और 59,000 इकाइयों के निर्माण का आदेश दिया है।

महत्व

COVID-19 संक्रमण वक्र समतल होना शुरू हो गया है और इसका प्रकोप नियंत्रण में है। स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार COVID-19 से संक्रमित लगभग 80% भारतीय रोगियों में से 15% को ऑक्सीजन की सहायता की आवश्यकता होगी और केवल 5% को वेंटिलेटर की आवश्यकता होगी। हालांकि यह संख्या कम लगती है, लेकिन मांग बढ़ सकती है क्योंकि स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में वर्तमान में केवल 40,000 वेंटिलेटर हैं। इसलिए, नए मॉडल का आविष्कार करना और वेंटिलेटर में आत्मनिर्भर बनना आवश्यक है।

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हबल स्पेस टेलीस्कोप: नासा के सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले स्पेस टेलीस्कोप ने 30वीं वर्षगांठ मनाई गयी

24 अप्रैल, 2020 को नासा ने हबल स्पेस टेलीस्कोप के लॉन्च के अपने 30 वर्षों का उत्सव मनाया। यह दुनिया में सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले स्पेस टेलीस्कोप में से एक है।

हबल स्पेस टेलीस्कोप

हबल स्पेस ऑब्जर्वेटरी यूरोपियन स्पेस एजेंसी के साथ साझेदारी में चलाया जाता है। ब्रह्मांड के त्वरित विस्तार की खोज में इस टेलिस्कोप ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हबल टेलीस्कोप ने ही आकाशगंगा के केंद्रों में ब्लैक होल के अस्तित्व का प्रमाण दिया था।

महत्व

इस टेलीस्कोप की अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा मरम्मत और अपग्रेडेशन की जाती रही है। इस अनूठी विशेषता के कारण ही यह टेलिस्कोप इतने समय समय तक कार्य कर सका।

कॉस्मिक रीफ

अपनी 30वीं वर्षगांठ पर, हबल टेलीस्कोप ने एक कॉस्मिक रीफ का चित्र लिया है। कॉस्मिक रीफ तारों का एक समूह है जो समुद्र में पाए जाने वाले कोरल रीफ की भाँती दिखता है। इस समूह में प्रत्येक तारा सूर्य के आकार का दस गुना है। यह तारे एक निहारिका (नेबुला) में हैं। नेबुला गैस और धूल का एक विशाल बादल है। इन तारों से निकलने वाली धूल के कारण नेबुला बनता है।

यह रीफ चारों ओर लाल रंग चमक रहा है। नाइट्रोजन और हाइड्रोजन गैस की चमक के कारण लाल रंग दृश्यमान होता है। रीफ में नीला रंग ऑक्सीजन की उपस्थिति के कारण है।

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