विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया गया

संपूर्ण विश्व में 10 अप्रैल, 2018 को ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ के रूप में मनाया गया । होम्योपैथी के संस्थापक जर्मनी के डॉ. क्रिश्चिन फ्रेडरिक सैमुएल हैनीमैन के जन्मदिन के उपलक्ष्य में यह दिवस मनाया जाता है।

मुख्य तथ्य

० आयुष मंत्रालय की ओर से 10 और 11 अप्रैल को इस अवसर पर नई दिल्‍ली में दो दिवसीय विज्ञान सम्‍मेलन का आयोजन किया जायेगा ।
० “नवाचार, विकास और प्रगति: चालीस वर्षों से विज्ञान की खोज” इस वर्ष सम्‍मेलन का मुख्‍य विषय है।
० सम्‍मेलन के प्रतिभागियों में होम्‍योपैथी चिकित्‍सक,होम्‍योपैथी के अनुसंधानकर्त्ता, शिक्षक तथा उद्योगपतियों सहित विभि‍न्‍न होम्‍योपैथिक संगठनों के प्रतिनिधि भी होंगे।
० डॉ. क्रिश्चिन फ्रेडरिक सैमुएल हैनीमैन की यह 263वीं जयंती है।

होम्योपैथी

यह एक चिकित्सा पद्धति है। डॉ॰ क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हैनीमैन होम्‍योपैथी चिकित्‍सा विज्ञान के जन्‍मदाता है। चिकित्सा के ‘समरूपता के सिंद्धात’ पर यह आधारित है चिकित्सक का मुख्य कार्य होमियोपैथी पद्धति में रोगी द्वारा बताए गए जीवन-इतिहास एवं रोगलक्षणों को सुनकर उसी प्रकार के लक्षणों को उत्पन्न करनेवाली औषधि का चुनाव करना है। रोग के लक्षण एवं औषधि के लक्षण में जितनी अधिक समानता होगी रोगी के स्वस्थ होने की संभावना भी उतनी ही अधिक रहती है। चिकित्सक का अनुभव ही उसका सबसे बड़ा सहायक होता है।

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पार्कर सोलर प्रोब: सूर्य पर पहुंचने के लिए जुलाई 2018 में होगा मिशन लॉन्च

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अपने अंतिम चरण में सूर्य की ओर एक अंतरिक्ष यान भेजने की योजना है। सूर्य के विषय में जानने की लालसा के तहत यह दुनिया का अपनी तरह का पहला मिशन है।

पार्कर सोलर प्रोब

o 31 जुलाई को पार्कर सोलर प्रोब नाम के इस अभियान को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा।
o पहले इस यान का नाम सोलर प्रोब प्लस था जिसे 2017 में बदलकर खगोलशात्री ड्यूजिन पार्कर के नाम पर पार्कर सोलर प्रोब कर दिया गया।
o यह इतिहास में पहली बार होगा जब कोई यान सूर्य के वातावरण में प्रवेश करेगा।
o यह सूर्य की कक्षा के करीब 40 लाख मील के घेरे में प्रवेश करेगा।

अभियान का लक्ष्य

o सौर आँधी के स्रोतों पर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र की बनावट और इनके डायनामिक्स की पहल यह अभियान करेगा।
o यह अभियान सूर्य के सबसे बाहरी हिस्से (कोरोना) को गर्म करने वाली तथा सौर तूफानों को गति प्रदान करने वाली ऊर्जा के बहाव को समझने में सहायक सिद्ध होगा।
o सूर्य के वातावरण से उत्सर्जित होने वाले ऊर्जा कणों को मिलने वाली गति के विषय में भी इसकी सहायता से जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
o यह अभियान सूर्य के आस-पास मौजूद धूल प्लाज़्मा को खंगालना और सौर आँधी एवं सौर ऊर्जा कणों पर उनके असर को समझने में मदद मिलेगी।
o पार्कर सोलर प्रोब को सूर्य की ताप से बचाने के लिये इसमें स्पेशल थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम (thermal protection system – TPS) यानी हीट शील्ड लगाई गई है। यह शील्ड फाइबर और ग्रेफाइट (ठोस कार्बन) से तैयार की गई है।
o इस हीट शील्ड की मोटाई 11.43 सेमी. है। सूर्य की बाहरी कक्षा इसकी सतह के मुकाबले सैकड़ों गुना ज़्यादा गर्म होती है। इसका तापमान 5 लाख डिग्री सेल्सियस या इससे भी ज़्यादा हो सकता है।
o यह शील्ड यान के बाहर तकरीबन 1370 डिग्री सेल्सियस का तापमान झेल सकेगी।
o सभी वैज्ञानिक उपकरणों एवं संचालन यंत्रों को इस शील्ड के पीछे व्यवस्थित किया जाएगा ताकि ये सभी यंत्र सूर्य की रोशनी से सीधे प्रभावित न हों
o डेल्टा 4 नामक एक राकेट से पार्कर सोलर प्रोब का प्रक्षेपण किया जाएगा।
o 6 साल 321 दिनों की इस अभियान की समयावधि होगी। इसमें चार ऐसे उपकरणों को भेजा जाएगा जो सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र, प्लाज़्मा और ऊर्जा कणों का परीक्षण कर उनकी 3 D तस्वीर तैयार करेंगे।

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