विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

नासा ने सफलतापूर्वक सुपरसोनिक मार्स लैंडिंग पैराशूट का परीक्षण किया

नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेश (नासा) ने ध्वनि की गति से चलने वाले सुपरसोनिक पैराशूट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। मंगल मिशन 2020 के दौरान इसी तरह के पैराशूट को इस्तेमाल किया जाना है। वैलप्स केंद्र से द एडवांस सुपरसोनिक पैराशूट इंफ्लेशन रिसर्च एक्सपेरीमेंट (एस्पायर) नामक इस पैराशूट को नासा के एक रॉकेट से 31 मार्च को लांच किया गया था ।
इसका उद्देश्य लाल ग्रह सरीखी परिस्थितियों में पैराशूट का परीक्षण करना है जिससे कि अभियान के दौरान पैराशूट मंगल पर आसानी से प्रवेश और लैंड कर सके।

यह पैराशूट लांच के बाद अटलांटिक महासागर में जा गिरा जहां से इसे नौका की मदद से निकाल लिया जाएगा। अटलांटिक महासागर में पिछले कुछ समय से मौसम खराब होने के कारण एस्पायर की लांचिंग में देरी हो रही थी। वैज्ञानिक अब महासागर से निकाले गए पैराशूट और कैमरे व अन्य उपकरणों में एकत्रित डाटा का अध्ययन करेंगे।
नासा के 2020 अभियान में इसके बाद मंगल पर भेजे जाने वाले रोवर के लिए पैराशूट तैयार किया जाएगा। छह पहियों वाले इस रोवर को नासा के क्यूरियोसिटी रोवर के आधार पर तैयार किया जाना है। लाल ग्रह पर जीवन की तलाश के साथ यह रोवर पृथ्वी पर लाने के लिए चट्टानों के नमूने भी जुटाएगा।

नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेश (नासा)

नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेश (नासा) का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत 19 जुलाई 1948 में इसके पूर्वाधिकारी संस्था नैशनल एडवाइज़री कमिटी फॉर एरोनॉटिक्स (एनसीए) के स्थान पर किया गया था। 1 अक्टूबर 1948 से इस संस्था ने कार्य करना शुरू किया। तब से लेकर आज तक अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण के सारे कार्यक्रम नासा द्वारा संचालित किए गए हैं जिनमे अपोलो चन्द्रमा अभियान, स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन और बाद में अंतरिक्ष शटल शामिल है। वर्तमान में नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को समर्थन दे रही है

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चीनी स्पेस स्टेशन तियांगोंग -1 का सफर दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में समाप्त हुआ

पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हुए चीनी स्पेस स्टेशन ‘तियांगोंग -1′ ग्रीनविच मानक समय 8 : 16 am पर चीनी अंतरिक्ष प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में नष्ट हो गया।

तियांगोंग-1

-सितंबर 2011 में तियांगोंग -1 को लॉन्च किया गया था। इसे अंग्रेज़ी में हैवेनली प्लेसेज के नाम से भी संबोधित किया जाता है।
-चीन का यह पहला प्रोटोटाइप स्पेस लैब प्रोजेक्ट था। इसे पृथ्वी की कक्षा से तकरीबन 350 किलोमीटर ऊपर स्थापित किया गया था।
-लैब को पहले दो साल की अवधि के लिये शुरू किया गया था, बाद में इसकी समय-सीमा को बढ़ा दिया गया। इसके ज़रिये कई अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, स्पेस-अर्थ रिमोट सेंसिंग और अंतरिक्ष वातारण संबंधी परीक्षण किये गए।
-तियांगोंग -1 एक तरह की रिसर्च लेबोरेटरी है जहाँ चीन अपने अंतरिक्ष यात्रियों को भेजता था। जून 2012 में चीन ने अपना Shenzhou 9 मिशन भी तियांगोंग -1 पर ही भेजा था।
-पहली बार इस मिशन पर एक चीनी महिला अंतिरक्ष यात्री ‘लियू यांग’ को भेजा गया था। इस मिशन में दो अन्य अंतरिक्ष यात्री ‘जिंग हेईपेंग’ और ‘लि यू वैंग’ भी शामिल थे।
-इसके बाद Shenzhou 10 को तियांगोंग -1 पर भेजा गया। इस मिशन के क्रू ने तियांगोंग -1 में 12 दिनों का समय बिताया।

इसके अंतरिक्ष से गिरने की वज़ह

मात्र दो साल की अवधि तक तियांगोंग -1 को काम करने की लिये तैयार किया गया था। चीन की योजना थी कि इसकी समयावधि समाप्त होने के बाद इसे पृथ्वी की कक्षा से बाहर कर दिया जाएगा, जिससे यह स्वयं ही अंतरिक्ष में नष्ट हो जाएगा। परंतु, अपनी योजना में बदलाव करते हुए चीनी अंतरिक्ष एजेंसी ने इसकी समय-सीमा को मई 2011 से मार्च 2016 तक बढ़ा दिया गया। तकरीबन 5 साल तक काम करने के बाद यह नियंत्रण से बाहर हो गया, जिसकी वज़ह से यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के चलते वातावरण में प्रवेश कर गया।

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