विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

रूस का एनर्जिया 2023 में पहली बार पर्यटकों को स्पेस वाक के लिए ले जाएगा

25 जून, 2020 को रूसी कंपनी एस.पी. कोरोलेव रॉकेट और अंतरिक्ष निगम एनर्जिया (RSC Energia) ने घोषणा की है कि यह 2023 में पहली बार पर्यटकों को स्पेस वाक पर ले जाएगा।

RSC Energia ने स्पेस एडवेंचर्स (अमेरिका की एक अंतरिक्ष पर्यटन कंपनी) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। आरएससी एनर्जिया रोस्कोसमोस (रूस की अंतरिक्ष एजेंसी) का एक हिस्सा है।

इस सौदे के अनुसार, दोनों कंपनियों के संयुक्त समझौते के तहत वर्ष 2023 में दो पर्यटकों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में भेजा जाएगा। आरएससी एनर्जिया की ओर से, दो पर्यटकों में से एक रोस्कोसमोस के एक कॉस्मोनॉट के साथ स्पेसवॉक करने में सक्षम होगा।

2001 से 2009 के बीच, रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने स्पेस एडवेंचर्स के साथ आठ पर्यटकों को अन्तरिक्ष में पहुँचाया है। 2001 में डेनिस टीटो (अमेरिका का एक व्यवसायी) विश्व के पहले निजी स्पेस एक्सप्लोरर बने थे। 2009 के बाद से, दुनिया में कोई अन्य अंतरिक्ष पर्यटन कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है। आज तक किसी भी स्पेस टूरिस्ट ने स्पेसवॉक नही किया है।

पृष्ठभूमि

स्पेस एक्स (अमेरिका स्थित अंतरिक्ष परिवहन सेवा और एयरोस्पेस निर्माता कंपनी) द्वारा रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के एकाधिकार को तोड़ने के एक महीने बाद यह घोषणा हुई है।

30 मई, 2020  तक केवल रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोसमोस के पास मानव को  सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम प्रौद्योगिकी थी। 30 मई, 2020 को स्पेस एक्स के फाल्कन 9 रॉकेट ने सफलतापूर्वक नासा के दो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन में पहुँचाया।

स्पेसएक्स ने फरवरी, 2020 में स्पेस एडवेंचर्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, दोनों कंपनियों ने अगले साल अंतरिक्ष पर्यटन यात्रा आयोजित करने की योजना बनाई है। इस यात्रा के लिए 3 अंतरिक्ष पर्यटकों को भेजा जाएगा। इस यात्रा में पर्यटकों के लिए स्पेसवॉक आयोजित नही की जायेगी।

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आईआईटी-बॉम्बे ने NAVIC/GPS  के लिए एक स्वदेशी रिसीवर चिप ‘ध्रुव’ विकसित की

आईआईटी-बॉम्बे के छात्रों और शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक स्वदेशी रिसीवर चिप ‘ध्रुव’ विकसित की है। इस चिप का उपयोग देश के स्थानों और मार्गों को खोजने के लिए स्मार्टफोन और नेविगेशन उपकरणों में किया जा सकता है। यह भारत के नेविगेशन उपग्रहों के NAVIC समूह के साथ-साथ अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम-आधारित उपग्रहों से किसी व्यक्ति के स्थान का सटीक निर्धारण करने के लिए संकेत प्राप्त करेगा।

NAVIC

IRNSS (Indian Regional Navigation System) NAVIC एक क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली है जो सटीक रियल-टाइम पोजिशनिंग तथा टाइमिंग सेवा उपलब्ध करवाती है, यह भारत तथा इसके 1500 किलोमीटर के दायरे के क्षेत्र में कार्य करती है। NAVIC (नाविक) में दो स्तर की सेवाएं प्रदान की जाती है, स्टैण्डर्ड पोजिशनिंग सर्विस तथा सीमित सर्विस। स्टैण्डर्ड पोजिशनिंग सर्विस नागरिक उपयोग के लिए प्रदान की जाती है, जबकि सीमित सेवा सेना समेत कुछ विशिष्ठ यूजर्स को प्रदान की जाती है। नाविक सिस्टम  में उपग्रहों की संख्या को 7 बढ़ाकर 11 किये जाने की योजना है।

IIT मद्रास

IIT मद्रास की स्थापना 1959 में पश्चिमी जर्मनी की सहायता से की गयी थी। यह IIT संस्थान तमिलनाडु में स्थित है, इसे राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान के रूप में चिन्हित किया गया है। इसका कैंपस लगभग 2.5 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।

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