विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ से इसरो का संपर्क टूटा

चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ का संपर्क इसरो के ग्राउंड स्टेशन से लैंडिंग से ठीक पहले टूट गया। जब यह संपर्क टूटा उस समय  ‘विक्रम’ चन्द्रमा की सतह से मात्र 2.1 किलोमीटर ऊपर था। अभी डाटा का विश्लेषण किया जा रहा है। अभी तक लैंडर ‘विक्रम’ की स्थिति के बारे में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जाना था।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश करेगा। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करेगा।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया जायेगा। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारेगा। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करेगा, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना है।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा होगा, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं। इजराइल का स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर क्रेश हो गया था।

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ब्लैकहोल का पहला चित्र लेने वाली वैज्ञानिक टीम को ‘ब्रेकथ्रू प्राइज’ से सम्मानित किया जायेगा

ब्लैकहोल का पहला चित्र लेने वाली वैज्ञानिक टीम को ‘ब्रेकथ्रू प्राइज’ से सम्मानित किया जायेगा। ‘ब्रेकथ्रू प्राइज’ को  विज्ञान का ऑस्कर पुरस्कार भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों की इस टीम को 3 मिलियन डॉलर की इनामी राशी भी दी जाएगी, इस इनामी राशी का वितरण 347 वैज्ञानिकों की टीम में किया जायेगा।

ब्लैक होल: ब्लैक होल (कृष्ण विवर) एक शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण युक्त खगोलीय क्षेत्र होता है जिसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति से प्रकाश भी नहीं बच सकता।

वैज्ञानिकों ने हाल ही में पहली बार ब्लैक होल का चित्र लिया था। इसके लिए शोध कार्य इवेंट होराइजन टेलिस्कोप (EHT) प्रोजेक्ट के तहत किया गया। यह कार्य 2012 में शुरू हुआ था। इसके लिए विश्व में 6 स्थानों पर टेलिस्कोप तैनात किये गये थे। वैज्ञानिकों ने जिस ब्लैक होल का चित्र लेने में सफलता प्राप्त की है, यह मेसियर 87 अथवा M87 गैलेक्सी के केंद्र  में है। यह ब्लैक होल पृथ्वी से लगभग 54 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है। इसका द्रव्यमान सूर्य से 6.5 अरब गुणा अधिक है।

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