विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

रूस लांच करेगा पहला ‘‘Arktika-M’’ उपग्रह

रूस की एक एयरोस्पेस कंपनी की हालिया घोषणा के अनुसार रूस आर्कटिक जलवायु और पर्यावरण की निगरानी के लिए पहला ‘‘Arktika-M’’ उपग्रह लॉन्च करने जा रहा है। इस उपग्रह का पहला संस्करण विकसित किया जा चुका है और इसे इस वर्ष लॉन्च किया जायेगा। जबकि दूसरा उपग्रह 2023 में लॉन्च किया जाएगा। रिमोट-सेंसिंग उपग्रह ‘Arktika-M’ से पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्र की मौसम संबंधी स्थितियों पर नजर रखी जायेगी और यह सटीक मौसम पूर्वानुमान में सहायता करेगा।

महत्व

यह उपग्रह ध्रुवीय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का अध्ययन करने में मदद करेगा और ध्रुवीय क्षेत्र में संसाधनों का पता लगाने में भी मदद करेगा। आर्कटिक क्षेत्र के संसाधन विवादों के केंद्र रहे हैं और इससे राष्ट्रों के बीच संघर्ष का संभावित खतरा भी है। बर्फ के बिना, महासागर अधिक विकिरण को अवशोषित करना शुरू कर देंगे।

ध्रुवीय में जलवायु परिवर्तन अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?

ध्रुवीय बर्फ तेजी से घट रही है। बर्फ हटाने से मीथेन निकलता है और जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है। ध्रुवीय क्षेत्र की बर्फ आने वाली सौर विकिरण को परावर्तित करती है। इसके कारण जल का ताप बढ़ जाएगा। इसके अलावा, महासागर अधिक ऊष्मा को अवशोषित करना शुरू कर देगा जिससे ग्लोबल वार्मिंग भी बढ़ेगी।

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रुहदार: आईआईटी बॉम्बे द्वारा विकसित किया गया कम लागत वाला मैकेनिकल वेंटीलेटर

IIT बॉम्बे और इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, NIT श्रीनगर के छात्रों ने “रुहदार” नामक एक कम लागत वाले वेंटिलेटर का आविष्कार किया है।

रूहदार

एक वेंटिलेटर के उत्पादन की लागत लगभग 10,000 रुपये है। इस डिजाइन की शुरुआत कश्मीर से आईआईटी बॉम्बे के प्रथम वर्ष के छात्र ने की थी। उन्होंने वेंटिलेटर डिजाइन करना तब शुरू किया, जब उन्हें ज्ञात हुआ कि उनके गृह क्षेत्र कश्मीर घाटी में केवल 97 वेंटिलेटर हैं।

देश में वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाने के लिए भारत सरकार दो-आयामी दृष्टिकोण लागू कर रही है, वेंटिलेटर का घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आपूर्ति प्राप्त करना। दूसरा विकल्प चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सभी देशों में वेंटिलेटर की मांग काफी अधिक है।

केंद्र सरकार ने भी देश में नौ निर्माताओं की पहचान की है और 59,000 इकाइयों के निर्माण का आदेश दिया है।

महत्व

COVID-19 संक्रमण वक्र समतल होना शुरू हो गया है और इसका प्रकोप नियंत्रण में है। स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार COVID-19 से संक्रमित लगभग 80% भारतीय रोगियों में से 15% को ऑक्सीजन की सहायता की आवश्यकता होगी और केवल 5% को वेंटिलेटर की आवश्यकता होगी। हालांकि यह संख्या कम लगती है, लेकिन मांग बढ़ सकती है क्योंकि स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में वर्तमान में केवल 40,000 वेंटिलेटर हैं। इसलिए, नए मॉडल का आविष्कार करना और वेंटिलेटर में आत्मनिर्भर बनना आवश्यक है।

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