विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

भारत और अमेरिका विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सौदे पर हस्ताक्षर करेंगे

केन्द्रीय कैबिनेट ने 24 अक्टूबर, 2019 को भारत और अमेरिका के बीच विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौते को मंज़ूरी दी।

विशेषताएं

  • दोनों देशों वैज्ञानिक तथा तकनीकी सूचना को साझा करेंगे।
  • दोनों देशों द्वारा सेमिनार तथा बैठकों का आयोजन किया जायेगा।
  • इस समझौते एक तहत आवश्यकता के अनुसार विज्ञानिकों तथा विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा सकती है।
  • दोनों देशों के वैज्ञानिक अनुसन्धान परियोजनाओं में मिलकर कार्य करेंगे।
  • दोनों देश विज्ञान तथा नवोन्मेष पर आधारित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की स्थापना की जायेगी।

महत्व

  • इस समझौते के तहत दोनों देश विज्ञान तथा तकनीक के क्षेत्र में आपसी महत्व के क्षेत्र में कार्य करेंगे, इससे द्विपक्षीय रिश्तों का नया अध्याय शुरू होगा।
  • इससे उच्च प्रभाव वाली नवोन्मेषी पार्टनरशिप्स को अधिक अवसर प्राप्त होंगे।

भारत-अमेरिका सम्बन्ध

विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग के सन्दर्भ में भारत और अमेरिका के बीच काफी अच्छे सम्बन्ध हैं। इसरो और नासा के बीच कई सूचना आदान-प्रदान कार्यक्रम है। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच बेहतर सम्बन्ध हैं, दोनों देशों ने कई तकनीक हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।

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DRDO ने भारत की अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक मिसाइल का निर्माण शुरू किया

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) ने भारत की अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक मिसाइलों का निर्माण शुरू कर दिया है। हाइपरसोनिक मिसाइलों आवाज़ की गति से पांच गुणा तेज़ गति से यात्रा करती हैं। इसके लिए DRDO ‘विंड टनल’ में तकनीक का परीक्षण करेगा।

महत्व

विश्व में हाइपरसोनिक हथियारों की टेक्नोलॉजी के लिए प्रतिस्पर्धा जारी है। अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश लगातार अपनी टेक्नोलॉजी का परीक्षण कर रहे हैं। चीन अपने पास हाइपरसोनिक हथियार होने का प्रदर्शन कर चुका है जबकि अमेरिका और रूस इस पर अभी चुप हैं।

हाइपरसोनिक हथियार

हाइपरसोनिक हथियार अत्याधिक तीव्र गति से पारंपरिक तथा परमाणु पेलोड ले जाने में सक्षम होते हैं। इस तकनीक की सहायता से आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली से बचा जा सकता है। हालांकि बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम भी तीव्र गति से हथियारों को लक्ष्य पर गिरा सकते हैं, परन्तु हाइपरसोनिक वाहनों को ट्रैक व इंटरसेप्ट करना बहुत मुश्किल होता है।

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