विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

नई दिल्ली में किया जाएगा विज्ञान समागम का आयोजन

नई दिल्ली में 21 जनवरी, 2020 को प्रगति विज्ञान के राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र में विज्ञान समागम का उद्घाटन किया जाएगा, इसका समापन 20 मार्च, 2020 को होगा। यह एक विज्ञान प्रदर्शनी होगी।

मुख्य बिंदु

इस प्रदर्शनी का आयोजन विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा परमाणु उर्जा विभाग के साथ मिलकर किया जाएगा। इससे पहले 8 मई से 7 जुलाई, 2019 के दौरान इस प्रदर्शनी का आयोजन मुंबई में किया गया, उसके बाद 29 जुलाई से 28 सितम्बर तक इसका आयोजन बंगलुरु में किया गया, कलकत्ता में इसका आयोजन 4 नवम्बर से 31 दिसम्बर, 2019 तक किया गया। इन तीन संस्करणों में 5.5 लाख लोग शामिल हुए ।

इस इवेंट का उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना तथा लोगों के जीवन पर विज्ञान के प्रभाव और महत्व पर प्रकाश डालना है ।

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भारत के GSAT-30 उपग्रह को फ्रेंच गुयाना से सफलतापूर्वक लांच किया गया

17 जनवरी, 2020 को भारत के GSAT-30 उपग्रह को फ्रेंच गुयाना से लांच किया गया, इसे एरियनस्पेस द्वारा लांच किया गया। इस उपग्रह की सहायता से INSAT-4A को रीप्लेस किया जायेगा।

GSAT-30 उपग्रह एक संचार उपग्रह है। यह सैटेलाइट 15 वर्षों तक कार्य करेगा। इसका निर्माण इसरो ने किया है। इस उपग्रह का उपयोग DTH टेलीविज़न सेवाओं, सेलुलर कनेक्टिविटी, टेलीविज़न अपलिंक इत्यादि में किया जायेगा। इस सैटेलाइट को एरियन 5 राकेट की सहायता से लांच किया जायेगा।

एरियन स्पेस

एरियनस्पेस एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है, इसकी स्थापना 1980 में की गयी थी। यह विश्व की पहली वाणिज्यिक लांच सर्विस प्रोवाइडर कंपनी है। इसका मुख्यालय कोर्कोनेस, एसोन, फ्रांस में स्थित है। इसके प्रमुख लांच व्हीकल्स हैं: एरियन 5, सोयुज़-2 और वेगा।
मई, 2017 के डाटा के अनुसार एरियनस्पेस अब तक 254 उड़ानों में 550 से अधिक सैटलाइट लांच कर चुका है। भारी सैटेलाइट्स को लांच करने के लिए इसरो भी एरियनस्पेस की सेवाओं का उपयोग करता है। एरियन स्पेस का वेगा राकेट चार चरणों वाला राकेट है, इसका निर्माण छोटे वाणिज्यिक उपग्रहों को लांच करने के लिए किया गया है। इस राकेट की ऊंचाई 30 मीटर है, यह 2500 किलोग्राम तक का पेलोड अन्तरिक्ष में ले जाने में सक्षम है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।
80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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