विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

माइक्रोसॉफ्ट ने लांच किया ‘K-12 एजुकेशन ट्रांसफॉर्मेशन फ्रेमवर्क’

अमेरिकी सॉफ्टवेर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में ‘K-12 एजुकेशन ट्रांसफॉर्मेशन फ्रेमवर्क’ लांच किया है, इसका उद्देश्य भारत के स्कूलों के डिजिटल रूपांतरण में सहायता करना है। अब तक इस मॉडल को 50 से अधिक देशों द्वारा अपनाया जा चुका है।

K-12 एजुकेशन ट्रांसफॉर्मेशन फ्रेमवर्क

इसका उद्देश्य विभिन टूल्स उपलब्ध करवा कर स्कूलों में महत्वाकांक्षी परिवर्तन लाना है तथा शिक्षा में टेक्नोलॉजी का समावेश करना है। इस फ्रेमवर्क के चार स्तम्भ हैं नेतृत्व व नीति, आधुनिक शिक्षा, बुद्धिमान परिवेश तथा टेक्नोलॉजी ब्लूप्रिंट।

माइक्रोसॉफ्ट

माइक्रोसॉफ्ट एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी है। इसका मुख्यालय वाशिंगटन के रेडमोंड में स्थित है। माइक्रोसॉफ्ट कंप्यूटर सॉफ्टवेयर तथा इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण करती है। माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना बिल गेट्स और पॉल एलन ने 4 अप्रैल, 1975 को की थी। वर्तमान में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय मूल के सत्य नडेला हैं। माइक्रोसॉफ्ट में 1,34,000 से अधिक लोग कार्य करते हैं। 2018 में माइक्रोसॉफ्ट का राजस्व 110.36 अरब डॉलर था।

माइक्रोसॉफ्ट के उत्पाद हैं : माइक्रोसॉफ्ट विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम, बिंग (सर्च इंजन), ऑफिस 365, आउटलुक, अज्योर, लिंक्डइन (प्रोफेशनल सोशल नेटवर्क), एक्स-बॉक्स (गेमिंग कंसोल) इत्यादि।

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चंद्रयान-2 का लैंडर ‘विक्रम’ लक्ष्य स्थान के 500 दायरे में लैंड में हुआ है : केंद्र सरकार

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री श्री जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में लिखित में जवाब देकर स्पष्ट किया है कि चंद्रयान-2 का लैंडर ‘विक्रम’ लक्ष्य स्थान के 500 दायरे में लैंड में हुआ था। चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ का संपर्क इसरो के ग्राउंड स्टेशन से लैंडिंग से ठीक पहले टूट गया था। जब यह संपर्क टूटा उस समय  ‘विक्रम’ चन्द्रमा की सतह से मात्र 2.1 किलोमीटर ऊपर था।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जाना था।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश की। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करने के लिए निर्मित किया गया था।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया गया। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो ने किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारने का प्रयास किया। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करने के लिए बनाया गया था, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना थी।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा था, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं। इजराइल का स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर क्रेश हो गया था।

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