राज्यों के करेंट अफेयर्स

केंद्र ने सूखे के लिए 6 राज्यों को जारी की एडवाइजरी

केंद्र सरकार ने हाल ही में 6 दक्षिणी तथा पश्चिमी राज्यों को सूखे के सम्बन्ध में एडवाइजर जारी की है और इन राज्यों को जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए कहा गया है। इन राज्यों के बांधों में जल स्तर में काफी कमी आई है।

मुख्य बिंदु

जल भारतीय संविधान की राज्य सूची में आता है। सूखे से सम्बंधित एडवाइजरी राज्यों को तब जारी की जाती है जब जलाशय में जल का स्तर पिछले 10 वर्षों के जल भण्डारण के औसत से 20% से कम हो।

केन्द्रीय जल आयोग केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा कायाकल्प  मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। यह देश के 91 प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध भंडारित जल की मॉनिटरिंग करता है।  हाल ही में केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी किये गये डाटा के अनुसार इन जलाशयों में केवल कुल भण्डारण क्षमता का केवल 22% (मई, 2019 में यह आंकड़ा 24% है) जल ही शेष है।

सूखे से सम्बंधित यह एडवाइजरी गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक को जारी की गयी है।

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अरुणाचल प्रदेश में मौजूद है भारत का 35% ग्रेफाइट भण्डार : GSI रिपोर्ट

जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का 35% ग्रेफाइट भंडार अरुणाचल प्रदेश में मौजूद है, यह अब तक खोजी गयी ग्रेफाइट की सर्वाधिक मात्रा है।

मुख्य बिंदु

हाल ही में जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में इस डाटा को प्रस्तुत किया। वर्तमान में भारत अन्य देशों से ग्रेफाइट का आयात करता है। अरुणाचल प्रदेश में भारत का 35% ग्रेफाइट भंडार मिलने के बाद अरुणाचल प्रदेश को देश का अग्रणी ग्रेफाइट उत्पादक राज्य बनाया जा सकता है, इससे देश की ग्रेफाइट आवश्यकता को भी पूर्ण किया जा सकता है। इस ग्रेफाइट के उत्पादन के लिए ड्रिलिंग भारत-चीन अंतर्राष्ट्रीय सीमा की ओर की जायेगी।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India)

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना 1851 में की गयी थी, शुरू में इसकी स्थापना रेलवे के लिए कोयले के भंडार खोजने के लिए की गयी थी। वर्षों के पश्चात् अब GSI भूविज्ञान सूचना का एक विशाल भंडार बन गया है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के भू-विज्ञानिक संगठन के रूप में उभर कर आया है।

यह संगठन केन्द्रीय खनन मंत्रालय के साथ कार्य करता है। यह राष्ट्रीय भू-विज्ञानिक सूचना का एकत्रीकरण तथा अपडेट करने का कार्य करता है। यह ज़मीनी सर्वेक्षण, हवाई व समुद्री सर्वेक्षण के द्वारा खनिज संसाधन का आकलन करता है। इसके अतिरिक्त यह भूकंप गतिविधियों का अध्ययन, प्राकृतिक आपदा का अध्ययन, हिमखंड विज्ञान इत्यादि विभिन्न विषयों पर अध्ययन करता है।

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