राज्यों के करेंट अफेयर्स

रक्षा मंत्री ने जम्मू और कश्मीर में छह सामरिक पुलों का ई-उद्घाटन किया

9 जुलाई, 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू और कश्मीर के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में 6 सामरिक पुलों का उद्घाटन किया। अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के साथ सामरिक महत्व वाले सभी छह पुलों का निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बेहद कठिन मौसम की स्थिति और दुर्गम इलाकों में काम करके रिकॉर्ड समय में किया गया है।

पुलों के बारे में

  • 6 में से 2 पुल कठुआ जिले के तरनाह नाले पर हैं
  • जम्मू जिले के अखनूर-पल्लनवाला रोड में 4 पुल स्थित हैं
  • इन सभी 6 पुलों का निर्माण सीमा सड़क संगठन ने प्रोजेक्ट संपर्क के तहत किया है
  • 6 पुलों की लंबाई न्यूनतम 30 मीटर से लेकर अधिकतम 300 मीटर तक है
  • 6 पुलों के निर्माण की कुल लागत 43 करोड़ रुपये थी
  • 6 पुलों का निर्माण क्षेत्र के सामरिक महत्व पर ध्यान केंद्रित करके किया गया है क्योंकि ये सभी पुल भारतीय सशस्त्र बलों के आवागमन को सुगम बनाने में मदद करेंगे।

तरनाह पुल

छह में से दो पुलों का निर्माण कठुआ जिले के तरनाह नाले में किया गया है। इन 2 पुलों में से, एक पुल 160 मीटर (तरनाह I पुल) लंबा है, जबकि दूसरा 300 मीटर (तरनाह II पुल) लंबा है।

160 मीटर का तरनाह I पुल पुराने सांबा कठुआ रोड पर है। 300 मीटर का तरनाह II पुल जम्मू-कठुआ राष्ट्रीय राजमार्ग पर है।

सीमा सड़क संगठन (BRO)

सीमा सड़क संगठन (BRO) भारत के सीमान्त क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का निर्माण तथा प्रबंधन करता है। यह संगठन अफ़ग़ानिस्तान, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका में भी अधोसंरचना निर्माण कार्य करता है। इसकी स्थापना 7 मई, 1960 को की गयी थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

शांतिकाल में सीमा सड़क संगठन (BRO) के कार्य निम्नलिखित हैं :

  • सीमा क्षेत्रों में ऑपरेशनल रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑफ़ जनरल स्टाफ का विकास व प्रबंधन।
  • अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगने वाले राज्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देना।

युद्धकाल में BRO के कार्य निम्नलिखित हैं:

  • ओरिजिनल सेक्टर तथा री-डिप्लाएड सेक्टर में लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल का प्रबंधन
  • युद्ध प्रयास के दौरान सरकार द्वारा सौंपे गये अतिरिक्त कार्य

 

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ओडिशा सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने वाला भारत का पहला राज्य बना

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सभी सरकारी भूमि पर नजर रखने के लिए वेब और मोबाइल आधारित समाधान ‘BLUIS’- भुवनेश्वर भूमि उपयोग खुफिया प्रणाली को 8 जुलाई, 2020 को लांच किया गया। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने  BLUIS को लांच किया।  सरकारी भूमि में अतिक्रमणों का पता लगाने के लिए दशकों से उपयोग किए जा रहे तंत्र के वर्तमान मैनुअल मोड में पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण BLUIS लॉन्च किया गया।

BLUIS

भुवनेश्वर भूमि उपयोग खुफिया प्रणाली (Bhubaneswar Land Use Intelligence System) एक जिओ-टैगेड रिपॉजिटरी है जो भुवनेश्वर में सभी सरकारी भूमि की निगरानी करेगा। यह उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी का उपयोग करके किया जाएगा।

भूमि पर कब्जा करने वालों द्वारा सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से बचाने के लिए BLUIS के लॉन्च से ओडिशा देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सैटेलाइट तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया है।

मुकदमेबाजी प्रबंधन प्रणाली लांच की गयी (Litigation Management System)

सरकारी अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच ‘एंड टू एंड’ संचार के लिए मुख्यमंत्री ने ‘मुकदमेबाजी प्रबंधन प्रणाली’ नामक ऑनलाइन एप्लीकेशन का लांच किया।  BLUIS और मुकदमेबाजी प्रबंधन प्रणाली उन 8 प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों में से हैं, जिन्हें 8 जुलाई 2020 को मुख्यमंत्री द्वारा 5T पहल के तहत लॉन्च किया गया था।

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