राज्यों के करेंट अफेयर्स

कैबिनेट ने असम गैस क्रैकर प्रोजेक्ट को केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय को सौंपा

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने असम गैस क्रैकर प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन करने वाली सार्वजनिक उद्यम की इकाई ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलीमर लिमिटेड का प्रशासनिक नियंत्रण केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकतिक गैस मंत्रालय को सौंपने के लिए मंज़ूरी दी है। इससे पहले ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलीमर लिमिटेड का प्रशासनिक नियंत्रण केन्द्रीय रसायन व उर्वरक मंत्रालय के अधीन रसायन व पेट्रोकेमिकल विभाग के पास था।

असम गैस क्रैकर प्रोजेक्ट

15 अगस्त, 1985 को असम एकॉर्ड पर हस्ताक्षर के बाद यह परियोजना अस्तित्व में आई थी। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है। इस परियोजना के तहत प्रतिवर्ष 2 लाख टन ईथीलीन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यह उत्तर-पूर्वी भारत में प्रथम पेट्रोकेमिकल परियोजना है। इसके पहले चरण को लम्बी देरी के बाद 2015 में कमीशन किया गया था।

इस परियोजना को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने अप्रैल 2006 में मंज़ूरी दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस परियोजना के लिए लेपेतकाता (डिब्रूगढ़ से 15 किलोमीटर दूर) ने आधारशिला रखी थी। गौरतलब है कि इस परियोजना को अप्रैल, 2012 में पूरा किया जाना था, परन्तु इसे नवम्बर, 2015 में कमीशन किया जा सका।

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दिल्ली कैबिनेट ने प्रदूषण पर नई नीति को मंज़ूरी दी

24 दिसम्बर, 2019 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में विद्युत् वाहनों को बढ़ावा दने के लिए नई नीति प्रस्तुत की। इस नीति के तहत सरकार विद्युत् वाहनों के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी।

मुख्य बिंदु

इस नीति का उद्देश्य 2024 नए पंजीकृत वाहनों में 25% विद्युत् वाहन शामिल करना है। इसके अलावा सरकार 250 चार्जिंग स्टेशन निर्मित करने की योजना भी बना रही है। इसमें 20% पार्किंग विद्युत् वाहनों के लिए निर्धारित की जायेगी। इस नीति का निर्माण UNEP (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम), विशेषज्ञों तथा अंतर्राष्ट्रीय परिवहन परिषद् से फीडबैक लेने के बाद किया गया है। इस नीति के पहले ड्राफ्ट को नवम्बर, 2018 में सार्वजनिक किया गया था।

यह नीति दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए आवश्यक है क्योंकि दिल्ली में 80% कार्बन मोनोऑक्साइड, 40% PM 2.5 तथा 80% नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में जीवाश्म इंधन से चलने वाले वाहनों का हिस्सा काफी ज्यादा है।

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