राज्यों के करेंट अफेयर्स

भारत और विश्व बैंक ने असम अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजना के लिए 88 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किये

असम सरकार, भारत सरकार और विश्व बैंक ने असम अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 88 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते का उद्देश्य ब्रह्मपुत्र नदी में असम की फेरी परिवहन सेवा का आधुनिकीकरण करना है।

असम अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजना का उद्देश्य असम की फेरी अधोसंरचना को सुधारना है तथा उन संस्थानों को मज़बूत करना है जो अंतर्देशीय जल परिवहन का संचालन करना है। इस परियोजना में नये उर्जा दक्ष पोत भी इस्तेमाल किये जायेंगे। इस परियोजना में कार्गो पोत भी शामिल किये जायेंगे।

अंतर्देशीय जल परिवहन परिवहन की लागत भी कम आती है और इससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है।

अंतर्देशीय जलमार्ग

असम में 15 जलमार्गों का संचालन किया जा रहा है, यह जलमार्ग बराक, बेकी, लोहित, दोयांग, कोपिली, सुबनसिरी, आई, दिहिंग, पुथिमारी, गंगाधर, जिन्जिराम और तिवांग नदियों पर हैं। यह जलमार्ग ब्रह्मपुत्र के द्वारा बंगाल की खाड़ी  को जोड़ते हैं।

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ब्रू लोगों के पुनर्वास के लिए समझौता किया गया

ब्रू विस्थापितों की समस्या का समाधान करने के लिए त्रिपुरा और मिजोरम के साथ मिलकर एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किये गये हैं, इस नए समझौते के अंतर्गत त्रिपुरा में ही ब्रू विस्थापितों को भूमि दी जायेगी और उन्हें त्रिपुरा में ही बसाया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार 600 करोड़ रुपये मंज़ूर किये हैं।

मुख्य बिंदु

इस समझौते में 5,407 ब्रू परिवारों (32,876  लोग) को शामिल किया गया है, यह त्रिपुरा में स्थायी शिविरों में रह रहे हैं। इन ब्रू परिवारों को 4-4 लाख रुपये दिए जायेंगे, यह राशी परिवार के मुखिया के खाते में फिक्स्ड डिपाजिट की जाएगी। इन परिवारों के घर के निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये तीन किश्तों में दिए जायेंगे। इसके अलावा इन परिवारों को दो वर्ष निशुल्क राशन दिया जायेगा तथा प्रतिमाह 5000 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।

पृष्ठभूमि

ब्रू (रियांग) जनजाति उत्तर-पूर्व के कुछ राज्य में निवास करती है। मिजोरम में यह जनजाति मामित और कोलासिब जिले में केन्द्रित है। 1997 में मिज़ो और ब्रू जनजातियों के बीच हिंसा के कारण ब्रू जनजाति के लोगों को मिजोरम छोड़कर त्रिपुरा में बसना पड़ा था। मिज़ो छात्र संघ द्वारा ब्रू लोगो को मतदाता सूची से हटाने की मांग कर रहा था, उनका मत था कि ब्रू मिजोरम के मूल निवासी नहीं हैं। इस हिंसा के बाद एक सशस्त्र ब्रू संगठन ‘ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट’ की स्थापना हुई थी। इसके अलावा एक राजनीतिक संगठन ब्रू नेशनल फ्रंट की स्थापना की गयी थी। त्रिपुरा से मिजोरम में ब्रू के पुनर्वास का पहला चरण नवम्बर, 2010 में शुरू हुआ था, जब 1,622 परिवारों के 8,573 को मिजोरम में बसाया गया था।

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