राज्यों के करेंट अफेयर्स

केंद्र सरकार ने उत्तर पूर्व प्राकृतिक गैस पाइपलाइन ग्रिड को मंज़ूरी दी

आर्थिक मामले की कैबिनेट समिति ने उत्तर पूर्व प्राकृतिक गैस पाइपलाइन ग्रिड को मंज़ूरी दे दी है। उत्तर पूर्व प्राकृतिक गैस ग्रिड लगभग 16560 किलोमीटर में फैला होगा। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर पूर्वी राज्यों को राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ना है। यह परियोजना केंद्र की ‘उर्जा गंगा गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत शुरू की गयी है।

मुख्य बिंदु

इस प्रोजेक्ट के तहत पाइपलाइन को गुवाहाटी से उत्तर पूर्व के सभी बड़े नगरों से जोड़ा जायेगा। इस परियोजना के तहत नुमालीगढ़ तेलशोधन कारखाने को भी इससे जोड़ा जायेगा। इस संयुक्त उद्यम में सभी कंपनियों की हिस्सेदारी बराबर होगी। इस प्रोजेक्ट के तहत आठ राज्यों असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की राजधानियों को जोड़ा जायेगा। 1500 किलोमीटर लम्बी इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 6,000 करोड़ रुपये है, यह प्रोजेक्ट 2022 में पूरा होगा।

उर्जा गंगा गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अक्टूबर, 2016 में की गयी थी। इसका उद्देश्य देश के पूर्वी क्षेत्र में खाना पकाने के लिए सभी घरों में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) तथा वाहनों के लिए CNG (संपीडित प्राकृतिक गैस) उपलब्ध करवाना है। इस प्रोजेक्ट के तहत उत्तर प्रदेश के जगदीशपुर से लेकर पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक 2050 किलोमीटर लम्बी पाइपलाइन बिछाने की योजना है। इसमें 5 राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा कवर किये जायेंगे। इस योजना का क्रियान्वयन सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।

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केंद्र सरकार ने सात राज्यों के लिए आपदा राहत फण्ड को मंज़ूरी दी

भारत सरकार ने सात राज्यों के लिए 5,908 करोड़ रुपये के आपदा राहत फण्ड मंज़ूर किये हैं। इसमें कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश शामिल है। यह राज्य बाढ़ और भूस्खलन से काफी प्रभावित हुए थे।

मुख्य बिंदु

गृह मंत्रालय के अधीन एक उच्च स्तरीय समिति ने 6 जनवरी, 2020 को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से आपदा राहत फण्ड को मनूरी दी है। 2019-20 में भारत सरकार ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष में अपने हिस्सेदारी में से 8,068 करोड़ रुपये जारी किये। इस फण्ड में 75% योगदान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है, जबकि 25% योगदान राज्यों द्वारा दिया जाता है।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष की स्थपाना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत की गयी थी। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं में तात्कालिक राहत प्रदान करना है। 2010 में राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक कोष का नाम बदलकर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष कर दिया गया था।

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