CSIR ने जिरेनियम उत्पादन की नई तकनीक विकसित की

वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) ने जिरेनियम पौधों के उत्पादन के लिए नई कम लागत वाली तकनीक क्विक्सित की है। जिरेनियम मेंविभिन्न प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह विकास अरोमा मिशन के तहत किया गया है।

मुख्य बिंदु

वर्तमान में जेरेनियम की कृषि पालीहाउस में की जाती है। अब इस नई तकनीक की सहायता से जेरेनियम की कृषि बाकी फसलों की तरह खेतों में की जा सकेगी। जेरेनियम की खेती की एक बड़ी समस्या महंगे पौधे हैं। नई तकनीक के कारण जेरेनियम के पौधे आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।

जिरेनियम

जिरेनियम का पौधा मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका में पाया जाता है, इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के तेलों में किया जाता है। जिरेनियम की बिजाई के लिए नवम्बर का माह सबसे उचित समय है। भारत में जिरेनियम की खेती हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तर-पूर्वी भारत में की जाती है।

अरोमा मिशन

इसका उद्देश्य किसानों की आजीविका की स्थिति में सुधार करना है तथा रोज़गार के अवसरों का सृजन करना है। इस मिशन के द्वारा राज्य में औषधीय व सुगन्धित पौधों की कृषि में वृद्धि होगी।

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