करेंट अफेयर्स - अप्रैल, 2019

गोल्डमैन एनवायर्नमेंटल प्राइज 2019

हाल ही में 6 ग्रासरूट पर्यावरण कार्यकर्ताओं को प्रतिष्ठित गोल्डमैन प्राइज 2019 से सम्मानित किया गया। उन्हें अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया के सैन फ्रांसिस्को ओपेरा हाउस में हुए कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में अमेरिका के पूर्व उप-राष्ट्रपति तथा पर्यावरण कार्यकर्ता अल्बर्ट गोर भी मौजूद थे।

गोल्डमैन एनवायर्नमेंटल प्राइज 2019 के विजेता

लिंडा गार्सिया : अमेरिका की लिंडा गार्सिया ने वाशिंगटन में उत्तरी अमेरिका के सबसे बड़े तेल निर्यात टर्मिनल के निर्माण पर स्थानीय समुदायों की सहायता से रोक लगाई।

एना कोलोविच लेसोस्का : नार्थ मैसिडोनिया की एना कोलोविच ने मवरोवो राष्ट्रीय उद्यान (देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान) में निर्मित किये जा रहे दो बड़े जलविद्युत उर्जा प्लांट की अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग को रोकने के लिए सात वर्ष तक अभियान चलाया।

बयारजर्गल अग्वांतसेरेन : मंगोलिया की बयारजर्गल ने विलुप्तप्राय बर्फीले तेंदुए के लिए 1.8 एकड़ में फैले हुए तोसोनबुम्बा नेचर रिज़र्व के निर्माण के लिए कार्य किया। उन्होंने इस रिज़र्व में खनन कार्य के लिए मंगोलिया की सरकार को सहमत किया।

अल्फ्रेड ब्राउनेल : लाइबेरिया  के पर्यावरण कार्यकर्ता व मानवाधिकार अधिवक्ता ने पाम आयल प्लांटेशन डेवेलपर्स द्वारा लाइबेरिया के उष्णकटिबंधीय वन को नष्ट किये जाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जैकलीन इवांस  : कुक आइलैंड्स की जैकलीन इवांस ने द्वीप की समुद्री जैव-विविधता की रक्षा के लिए पञ्च वर्षीय अभियान चलाया।

अल्बर्टो कुरामिल : चिली के अल्बर्टो कुरामिल ने चिली के कौतिन नदी पर जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण का विरोध किया, बाद में उन्हें जेल में डाल दिया गया।

गोल्डमैन एनवायर्नमेंटल प्राइज

यह एक वार्षिक पुरस्कार है, इसकी स्थापना 1989 में अमेरिका के रिचर्ड और रोडा गोल्डमैन ने की थी। इस पुरस्कार को ग्रीन नोबेल प्राइज भी कहा जाता है। इस पुरस्कार के विजेता को 200,000 इनामस्वरुप दिए जाते हैं। यह पुरस्कार गोल्डमैन एनवायर्नमेंटल फाउंडेशन द्वारा दिया जाता है। इसके द्वारा उन पर्यावरण कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जाता है जो पर्यावरण की रक्षा के लिए कार्य करते हैं।

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केंद्र सरकार ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के निर्माण के लिए GRSE को अनुबंध दिया

केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के निर्माण के लिए GRSE को अनुबंध दिया है। यह अनुबंध 6,311 करोड़ रुपये में दिया गया है। यह 8 सबमरीन (पनडुब्बी) रोधी युद्धक सतही जल पोत भारतीय नौसेना के लिए निर्मित की जायेंगी।

मुख्य बिंदु

भारतीय नौसेना ने अप्रैल, 2014 में RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी की थी। GRSE ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के डिजाईन व निर्माण के लिए विनिंग बिड लगायी थी ।

GRSE द्वारा इन पोतों का निर्माण करना “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इस अनुबंध के तहत पहली पोत अनुबंध पर हस्ताक्षर किये जाने के बाद 42 महीने के अन्दर डिलीवर की जायेगी। इसके बाद प्रतिवर्ष दो पोत डिलीवर की जायेंगी। यह प्रोजेक्ट 84 महीने में पूर्ण हो जाएगा।

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स (GRSE)

  • यह सार्वजनिक क्षेत्र का एक रक्षा उपक्रम है, भारत के अग्रणी सरकारी शिपबिल्डर्स में से एक है, यह पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में स्थित है। यह वाणिज्यिक तथा नौसैनिक वेसल का निर्माण व मरम्मत करता है। अब यह निर्यात जहाजों का निर्माण भी कर रहा है।
  • इसकी स्थापना 1884 में हुगली नदी के किनारे एक छोटी निजी कंपनी के रूप में हुई थी। 1916 में इसका नाम बदलकर गार्डन रीच वर्कशॉप रखा गया था। वर्ष 1960 में सरकार द्वारा इसका राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • GRSE एक “मिनीरत्न” है। यह 100 युद्धपोत निर्मित करने वाला पहला भारतीय शिपयार्ड है। यह वर्तमान में P17A प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए 3 स्टेल्थ फ्रिजेट्स का निर्माण कर रहा है।
  • GRSE द्वारा निर्मित 100 युद्धपोतों में एडवांस्ड फ्रिजेट्स, एंटी-सबमरीन वॉरफेयरक कार्वेट से लेकर फ्लीट टैंकर तक शामिल है।

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