करेंट अफेयर्स - अप्रैल, 2019

भारतीय सेना ने राष्ट्रीय हाइड्रोएलेक्टिक पॉवर कारपोरेशन (NHPC) के साथ MoU पर हस्ताक्षर किये

भारतीय सेना ने राष्ट्रीय हाइड्रोएलेक्टिक पॉवर कारपोरेशन (NHPC) के साथ MoU पर हस्ताक्षर किये, इस समझौते के तहत NHPC चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा के निकट गोला-बारूद के भण्डारण के लिए भूमिगत सुरंगों का निर्माण करेगा। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, यह सुरंगे दो वर्ष के भीतर तैयार कर ली जायेंगी। इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 15 करोड़ रुपये है।

मुख्य बिंदु

इस पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत तीन सुरंगों का निर्माण चीन के साथ लगने वाली सीमा पर किया जायेगा जबकि एक सुरंग का निर्माण पाकिस्तान के साथ लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल के साथ किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट भारतीय सेना के लिए बहुत ज़रूरी है। सीमा के साथ लगने वाले क्षेत्र में अधोसंरचना के मामले में चीन भारत से काफी आगे है। वर्तमान में भारतीय सेना अपने गोला-बारूद को भूमि के ऊपर बने स्थान पर रखती है, इस प्रकार के गोला-बारूद को दुश्मन देश के सैटेलाइट ढूंढ सकते हैं।

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रयुगु क्षुद्रग्रह पर कृत्रिम क्रेटर का निर्माण हुआ

जापान के वैज्ञानिक रयुगु क्षुद्रग्रह पर सफलतापूर्वक कृत्रिम क्रेटर का निर्माण किया है। इस महीने के आरम्भ में जापान के हायाबुसा 2 मिशन ने रयुगु क्षुद्रग्रह की सतह पर विस्फोटक गिराया था। इसका उद्देश्य सौर मंडल के निर्माण के बारे में जानकारी प्राप्त करना है।

हायाबुसा 2

हायाबुसा 2 जापानी अन्तरिक्ष एजेंसी द्वारा भेजा गया मिशन है। इससे पहले हायाबुसा नाम से एक अन्य मिशन भेजा गया था जो 2010 में क्षुद्रग्रह के नमूने लेकर वापस आया था। हायाबुसा 27 जून, 2018 को रयुगु क्षुद्रग्रह पर पहुंचा था। यह डेढ़ वर्ष तक रयुगु क्षुद्रग्रह का अध्ययन करेगा तथा बाद में नमूने वापस लेकर पृथ्वी पर लौटेगा। यह मिशन संभवतः दिसम्बर, 2020 तक पृथ्वी पर सैंपल लेकर वापस लौटेगा।

रयुगु क्षुद्रग्रह

रयुगु क्षुद्रग्रह पृथ्वी के निकट मौजूद है, यह अपोलो समूह का क्षुद्रग्रह है। इससे सौर प्रणाली से सम्बंधित काफी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इससे ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति तथा विकास के बारे में जानकारी मिल सकती है।
हायाबुसा 2 जापानी अन्तरिक्ष एजेंसी द्वारा भेजा गया मिशन है। इससे पहले हायाबुसा नाम से एक अन्य मिशन भेजा गया था जो 2010 में क्षुद्रग्रह के नमूने लेकर वापस आया था। हायाबुसा 27 जून, 2018 को रयुगु क्षुद्रग्रह पर पहुंचा था। यह डेढ़ वर्ष तक रयुगु क्षुद्रग्रह का अध्ययन करेगा तथा बाद में नमूने वापस लेकर पृथ्वी पर लौटेगा। यह मिशन संभवतः दिसम्बर, 2020 तक पृथ्वी पर सैंपल लेकर वापस लौटेगा।

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