करेंट अफेयर्स - अप्रैल, 2019

केंद्र सरकार ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के निर्माण के लिए GRSE को अनुबंध दिया

केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के निर्माण के लिए GRSE को अनुबंध दिया है। यह अनुबंध 6,311 करोड़ रुपये में दिया गया है। यह 8 सबमरीन (पनडुब्बी) रोधी युद्धक सतही जल पोत भारतीय नौसेना के लिए निर्मित की जायेंगी।

मुख्य बिंदु

भारतीय नौसेना ने अप्रैल, 2014 में RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी की थी। GRSE ने 8 सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत के डिजाईन व निर्माण के लिए विनिंग बिड लगायी थी ।

GRSE द्वारा इन पोतों का निर्माण करना “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इस अनुबंध के तहत पहली पोत अनुबंध पर हस्ताक्षर किये जाने के बाद 42 महीने के अन्दर डिलीवर की जायेगी। इसके बाद प्रतिवर्ष दो पोत डिलीवर की जायेंगी। यह प्रोजेक्ट 84 महीने में पूर्ण हो जाएगा।

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स (GRSE)

  • यह सार्वजनिक क्षेत्र का एक रक्षा उपक्रम है, भारत के अग्रणी सरकारी शिपबिल्डर्स में से एक है, यह पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में स्थित है। यह वाणिज्यिक तथा नौसैनिक वेसल का निर्माण व मरम्मत करता है। अब यह निर्यात जहाजों का निर्माण भी कर रहा है।
  • इसकी स्थापना 1884 में हुगली नदी के किनारे एक छोटी निजी कंपनी के रूप में हुई थी। 1916 में इसका नाम बदलकर गार्डन रीच वर्कशॉप रखा गया था। वर्ष 1960 में सरकार द्वारा इसका राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • GRSE एक “मिनीरत्न” है। यह 100 युद्धपोत निर्मित करने वाला पहला भारतीय शिपयार्ड है। यह वर्तमान में P17A प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए 3 स्टेल्थ फ्रिजेट्स का निर्माण कर रहा है।
  • GRSE द्वारा निर्मित 100 युद्धपोतों में एडवांस्ड फ्रिजेट्स, एंटी-सबमरीन वॉरफेयरक कार्वेट से लेकर फ्लीट टैंकर तक शामिल है।

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साइबर अपराध रिपोर्ट 2019 : मुख्य बिंदु

हाल ही में RSA सिक्यूरिटी (अमेरिकी कंप्यूटर व नेटवर्क सिक्यूरिटी कंपनी) ने “करेंट स्टेट ऑफ़ साइबर क्राइम -2019” नामक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में सोशल फ्रॉड में 43% की वृद्धि हुई है, रिपोर्ट में 2019 में भी इस ट्रेंड के जारी रहने के आसार हैं।

मुख्य बिंदु

  • फेसबुक, इन्स्टाग्राम, व्हाट्सएप्प, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म आपराधिक धोखेबाजी, साइबर अपराधियों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं, इससे अपराधियों को वार्तालाप करने, क्रेडिट कार्ड के नंबर चुराने इत्यादि कार्यों में काफी आसानी होती है।
  • 2015 और 2018 में मोबाइल एप्प के ज़रिये किये जाने वाले फ्रॉड में 680% की वृद्धि हुई है।
  • इस रिपोर्ट में बढ़ती हुई फ्रॉड मोबाइल एप्प के बारे में चेतावनी दी गयी है।
  • इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराधी साइबर एक्टिविटी को और अधिक कुशल बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं।

सरकार द्वारा उठाये गये कदम

राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC) : यह एक ऑपरेशनल साइबर सिक्यूरिटी तथा ई-सर्विलांस एजेंसी है, यह संचार का मेटाडाटा प्राप्त करती है और अन्य इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् सचिवालय के अंतर्गत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक (NCSC) साइबर सुरक्षा से सम्बंधित मामलों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय करती है।

सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 लागू किया, इसके द्वारा इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन (संचार), इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स तथा साइबर अपराधों इत्यादि को कानूनी मान्यता दी गयी है। यह अधिनियम साइबर अपराधों को रोकने में काफी कारगर सिद्ध हुआ है।

देश की अति आवश्यक सूचना अधोसंरचना की सुरक्षा के लिए National Critical Information Infrastructure Protection Centre (NCIIPC) की स्थापना की गयी।

नागरिकों, व्यापार तथा सरकार के लिए भरोसेमंद व सुरक्षित साइबरस्पेस उपलब्ध करवाने के लिए राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति (2013) का निर्माण किया गया।

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