करेंट अफेयर्स - अप्रैल, 2019

विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस : 26 अप्रैल

प्रतिवर्ष 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस मनाया जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 2000 में विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन (WIPO) द्वारा की गयी थी। इसका उद्देश्य पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क तथा डिजाईन के महत्त्व के बारे में जागरूकता फैलाना है। 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1970 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन की स्थापना के लिए समझौता लागू हुआ था। इस वर्ष विश्व बौद्धिक संपदा दिवस की थीम “रीच फॉर गोल्ड : इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एंड स्पोर्ट्स” है।

विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन (WIPO)

विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है, इस वैश्विक संस्था का कार्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा तथा संवर्द्धन करना है। इसकी स्थापना 1967 में की गयी थी, इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है। इसका उद्देश्य रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देना है तथा विश्व भर में बौद्धिक सम्पदा के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करना है। वर्तमान में इस संस्था में कुल 188 देश शामिल हैं। भारत भी इसका सदस्य है।

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जस्टिस इंदु मल्होत्रा को मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई के विरुद्ध यौन शोषण के मामले की जांच के लिए गठित पैनल में शामिल किया गया

जस्टिस इंदु मल्होत्रा को मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई के विरुद्ध यौन शोषण के मामले की जांच के लिए गठित पैनल में शामिल किया गया है, उन्हें इस पैनल में एन.वी. रमण के स्थान पर शामिल किया गया है

23 अप्रैल, 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई के विरुद्ध यौन शोषण के मामले की जांच के लिए पैनल का गठन किया था। इस पैनल का नेतृत्व जस्टिस एस. ऐ. बोबडे कर रहे हैं। इस जांच पैनल में जस्टिस एन. वी. रमण तथा जस्टिस इंदिरा बनर्जी भी शामिल थे। एन.वी. रमण ने स्वयं को इस पैनल से अलग कर लिया है। दरअसल हाल ही में पीड़िता ने जांच पैनल को पत्र लिख कर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा था कि जस्टिस रमण मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की करीबी मित्र हैं इसलिए उन्हें जांच पैनल से हटाया जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई पर 35 वर्षीय महिला ने यौन शोषण के आरोप लगाये थे, मुख्य न्यायधीश के विरुद्ध यौन शोषण के इस मामले के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने 20 अप्रैल, 2019 को विशेष बेंच का गठन किया था, इस बेंच में रंजन गोगोई, अरुण मिश्र तथा संजीव खन्ना शामिल थे। इस बेंच ने महिला द्वारा लगाए गये आरोपों को गलत करार दिया और आरोपों को निराधार बताया। इस दौरान पीठ ने कहा कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नष्ट करने का प्रयास है।

19 अप्रैल, 2019 को मुख्य न्यायधीश के आवासीय कार्यालय में कार्य करने वाली कनिष्ठ न्यायालय सहायक ने सर्वोच्च न्यायालय के 22 न्यायधीशों को पत्र लिखकर मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

जस्टिस रंजन गोगोई

जस्टिस रंजन गोगोई का जन्म 18 नवम्बर, 1954 को हुआ था, वे असम के निवासी हैं। वे असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशब चन्द्र गोगोई के पुत्र हैं। उन्होंने आरम्भ में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में कार्य किया। फरवरी, 2001 में उन्हें उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायधीश के रूप में नियुक्त किया गया। सितम्बर, 2010 में उनका स्थानांतरण पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में किया गया जहाँ फरवरी, 2011 में उन्हें मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया गया। अप्रैल, 2012में उनकी नियुक्ति देश के सर्वोच्च न्यायालय में हुई थी।

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