करेंट अफेयर्स - अप्रैल, 2019

नासा के TESS मिशन ने पृथ्वी के आकार के ग्रह की खोज की

नासा के TESS (Transiting Exoplanet Survey Satellite) मिशन ने पृथ्वी के आकार के ग्रह की खोज की है।

मुख्य बिंदु

  • HD 21749C नामक ग्रह पृथ्वी के व्यास के 89% के बराबर है।
  • HD 21749C ग्रह के-टाइप स्टार है, इसका द्रव्यमान सूर्य का 70% है, यह दक्षिणी तारामंडल रेटिकुलम में 53 प्रकाश वर्ष दूर है।
  • HD 21749C ग्रह TESS द्वारा खोजा गया 10वां गृह है, अभी सैंकड़ों अन्य संभावित ग्रहों का अध्ययन किया जा रहा है।

HD 21749C ग्रह पर जीवन की अधिक आशा नहीं की जा सकती, यह अपने सूर्य की परिक्रमा काफी नज़दीक से करता है, यह केवल 7.8 दिन में ही सूर्य की एक परिक्रमा पूरी कर लेता है। सूर्य के इतना नज़दीक होने के कारण इसका तापमान भी अत्याधिक होगा।

टेस (Transiting Exoplanet Survey Satellite)

TESS मिशन का नेतृत्व मेसाचुसेट्स टेक्नोलॉजी संस्थान की कावली इंस्टिट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च द्वारा किया जा रहा है। TESS को पृथ्वी के निकट तारे की परिक्रमा करने वाले ग्रहों की खोज के लिए डिजाईन किया गया है। इस प्रकार के ग्रहों की उपस्थिति की जानकारी तब मिल सकेगी जब किसी तारे के सामने ग्रह के गुजरने के कारण तारे की रौशनी कम हो। TESS, अन्तरिक्ष वेधशाला केप्लर का उत्तराधिकारी है। वर्तमान में ज्ञात अधिकतर बाह्य ग्रहों की खोज केप्लर द्वारा की गयी है।

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मई में लांच किया जा सकता है भारत का मिशन चंद्रयान 2

इसरो मिशन चंद्रयान 2 को मई में लांच कर सकता है। इस मिशन को अब तक छठवीं बार स्थगित किया जा चुका है। दरअसल हाल ही में एक परीक्षण चन्द्रमा पर लैंड किये जाने वाले वाहन (लैंडर) “विक्रम” को हल्की सी क्षति पहुंची है। आवश्यक सुधार करने के बाद लांच की नई तारीख की घोषणा की जायेगी। इस मिशन को मई के माह में लांच किये जाने की उम्मीद जताई गयी है। हाल ही में इजराइल का स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर लैंड करने से पहले दुर्घटना का शिकार हुआ था और वह चन्द्रमा की सतह पर क्रेश होकर गिर गया था।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जायेगा।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश करेगा। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करेगा।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया जायेगा। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारेगा। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करेगा, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना है फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है। यह डाटा पृथ्वी तक ऑर्बिटर के द्वारा भेजा जायेगा फिलहाल इजराइल भी दिसम्बर, 2018 में चन्द्रमा पर मिशन उतारने की तैयारी कर रहा है।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा होगा, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं।

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