करेंट अफेयर्स - अप्रैल, 2019

दिल्ली उच्च न्यायालय ने असम राइफल्स पर याचिका के सम्बन्ध में केंद्र से माँगा जवाब

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुरक्षा पर कैबिनेट समिति से असम राइफल्स पर दायर याचिका के बारे में जवाब माँगा है, इस याचिका में असम राइफल्स पर द्वैध नियंत्रण को समाप्त करके इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन किये जाने के लिए कहा गया है।

मुख्य बिंदु

  • असम राइफल्स को सेंटिनल्स ऑफ़ द नार्थईस्ट भी कहा जाता है, यह भारत का सबसे पुराना अर्द्धसैनिक बल है।
  • असम राइफल्स का प्रशासनिक नियंत्रण केन्द्रीय गृह मंत्रालय के पास है जबकि इसका ऑपरेशनल नियंत्रण रक्षा मंत्रालय के पास है।
  • आल इंडिया असम राइफल्स एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन ने याचिका दायर करके कहा है कि यह द्वैध नियंत्रण असम राइफल्स के जवानों के अधिकारों का हनन है।
  • इस याचिका द्वारा भारत सरकार (कार्य विभाजन) नियम, 1961 को चुनौती दी गयी है, इसमें असम राइफल्स को पुलिस की श्रेणी में रखा गया है।
  • याचिका में तर्क दिया गया है कि असम राइफल्स का कार्य सैन्य तथा अर्द्धसैनिक बल प्रकृति का है, इसलिए असम राइफल्स को पुलिस की श्रेणी में रखा जाना उचित नहीं है और यह सैनिकों के अधिकारों का हनन है।
  • इस याचिका में असम राइफल्स के जवानों को भारतीय सेना के समान वेतन व भत्ते दिए जाने की मांग की गयी है।

इससे पहले केन्द्रीय गृह मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय को बैठक आयोजित करके मामले के समाधान पर चर्चा करने के लिए कहा गया था। इस पर गृह मंत्रालय ने कहा था कि सुरक्षा पर कैबिनेट समिति को इस सन्दर्भ में नोट भेज दिया गया है। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुरक्षा पर कैबिनेट समिति से जवाब तलब किया है।

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राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने जैव विविधता प्रबंधन समितियों के गठन के सम्बन्ध में केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने जैव विविधता प्रबंधन समितियों के गठन के सम्बन्ध में केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सबमिट की जानी है। चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली खंड पीठ ने राज्यों को एफिडेविट फाइल करके समितियों की स्थापना न करने का कारण पूछा है। ट्रिब्यूनल द्वारा गठित मॉनिटरिंग समिति की सूचना के अनुसार 2,52,709 ग्राम पंचायतों में जैव-विविधता प्रबंधन समितियों की स्थापना की जानी थी, परन्तु अब तक केवल 1,44,371 जैव-विविधता प्रबंधन समितियों की स्थापना हो पायी है। अभी भी एक लाख से अधिक जैव-विविधता समितियों की स्थापना की जानी शेष है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)

पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम, 2010 के तहत वर्ष 2010 में एनजीटी की स्थापना की गयी थी। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो भारत के नागरिकों को स्वस्थ वातावरण का अधिकार प्रदान करता है। एनजीटी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाता है। इसमें पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं। प्रत्येक श्रेणी में निर्धारित न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्य की न्यूनतम संख्या 10 है तथा प्रत्येक श्रेणी में अधिकतम संख्या 20 होती है।

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