करेंट अफेयर्स – अप्रैल, 2020

ग्रामीण क्षेत्रों में ई-कॉमर्स का कार्य करेंगे भारत सरकार के सामान्य सेवा केंद्र

29 अप्रैल, 2020 को भारत सरकार ने घोषणा की कि कॉमन सर्विस सेंटर अब गाँव स्तर की ऑनलाइन रिटेल चेन का काम संभालेंगे। इस कदम से ग्रामीण क्षेत्र के 60 करोड़ से अधिक लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।

मुख्य बिंदु

सामान्य सेवा केंद्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट और अमेज़ॅन का कार्य संभालना है। इस पहल का प्रचार भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है। परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंधों से उत्पन्न कठिनाइयों को दूर करने के लिए गाँव-स्तर की ऑनलाइन खुदरा श्रृंखलाएँ बनाई जा रही हैं। इस पहल के माध्यम से भारत सरकार की बड़े पैमाने पर आवश्यक आपूर्ति प्रदान करने की योजना है।

इन आउटलेट्स को निजी व्यक्तियों द्वारा स्थापित और चलाया जाएगा। हालांकि, उन्हें सीधे इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा मॉनिटर किया जायेगा।

सामान्य सेवा केंद्र

कॉमन सर्विस सेंटर दूध, सब्जियों, फलों, दालों आदि जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करेंगे। उपभोक्ता विशेष एप्लीकेशन के माध्यम से इन केंद्रों पर अपने आर्डर दे सकेंगे।

कॉमन सर्विस सेंटर 2006 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत स्थापित किए गए थे। उन्हें शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस और मनोरंजन के क्षेत्रों में लागत प्रभावी, उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था।

सीएससी की स्थापना सभी ग्रामीण नागरिकों तक जानकारी पहुंचाने के लिए की गई थी। यह ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को कौशल उन्नयन में भी मदद करता है।

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लॉक डाउन से गंगा नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार हुआ

22 मार्च, 2020 को देश में लगाए गए लॉक डाउन ने हवा की गुणवत्ता और पानी की गुणवत्ता में सुधार किया है। CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के अनुसार जल निकायों में 40 मिलियन लीटर अपशिष्ट जल प्रवेश करता है।

मुख्य बिंदु

एक नदी के जल प्रदूषण को बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) के आधार पर मापा जाता है। गंगा औद्योगिक अपशिष्ट और अनुपचारित सीवेज के लिए डंप यार्ड बन गई है। 1985 के बाद से, गंगा एक्शन प्लान I के साथ गंगा को साफ करने के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। 2015 में गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए सबसे बड़ी पहल नमामि गंगे शुरू की गई।

COVID-19 के बाद

सीपीसीबी के रियल-टाइम मॉनिटरिंग डाटा के मुताबिक, गंगा के 36 निगरानी बिंदुओं में से 27 अब स्वच्छ हैं, वहां पर नदी के जल वन्यजीवों और मत्स्य पालन के लिए उपयुक्त हैं।

कारण

पानी की गुणवत्ता में सुधार का प्रमुख कारण यह है कि घाटों के पास स्नान, पर्यटन, मेले जैसी गतिविधियाँ रोक दी गईं। साथ ही, नदी के आसपास की प्रमुख औद्योगिक गतिविधियों को रोक दिया गया।

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