करेंट अफेयर्स– दिसंबर, 2018

कोल इंडिया द्वारा किया जा रहा है स्वदेशी निर्मित इलेक्ट्रिक-डम्पर का ट्रायल

कोल इंडिया पहली बार स्वदेशी इलेक्ट्रिक डम्पर का ट्रायल कर रहा है, डम्पर खनन कार्य के लिए बेहद आवश्यक है। बिजली से चलने वाले इस डम्पर का वज़न 205 टन है। इसका निर्माण सरकारी कंपनी BEML ने किया है। कोल इंडिया इस डम्पर का ट्रायल उत्तरी उत्तरी कोयला क्षेत्र की अम्लोहरी कोयला खदान में कर रहा है। यह स्वदेशी डम्पर उत्तरी कोयला क्षेत्र में उपयोग किया जाने वाले सबसे बड़ा स्वदेशी डम्पर है। इस स्वदेश डम्पर से आपूर्तिकर्ताओं के बीच स्पर्धा बढ़ जायेगी, जिससे लागत में कमी आ सकती है।

लाभ

  • इस डम्पर के सफल ट्रायल के बाद BEML कोल इंडिया के अधिक क्षमता वाले डम्पर के टेंडर के लिए आवेदन कर सकती है।
  • नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड इस प्रकार का एक टेंडर जारी कर चुकी है जबकि ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड 10 डम्पर के लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया को पूरा कर रही है।
  • भारतीय डम्पर बाज़ार में रूस के बेलाज़, टाटा हिताची और केटरपिलर का दबदबा है। परन्तु इन डम्पर की लागत 15 करोड़ रुपये से भी अधिक है।
  • यदि BEML को ई-डम्पर मार्किट में प्रवेश करने का मौका मिलता है तो यह बाज़ार में बड़ी कंपनियों को टक्कर दे सकता है। इससे BEML के लिए अवसर बढ़ जायेंगे। इससे मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा और कोल इंडिया को कम दाम पर डम्पर मिल सकेंगे।

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अंडमान के द्वीपों का नाम नेताजी बोस के नाम पर रखा जायेगा

केंद्र सरकार ने अंडमान के रोस, नील और हेवलॉक द्वीप के नाम को बदलने का निर्णय लिया है। रोस, नील तथा हेवलॉक द्वीप का नाम क्रमशः नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वीप, शहीद द्वीप तथा स्वराज द्वीप किया जायेगा। इस नाम परिवर्तन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 30 दिसम्बर को अंडमान की यात्रा के दौरान की जा सकती है। 30 दिसम्बर को नेताजी की अंडमान यात्रा के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

अंडमान द्वीप के साथ नेताजी का सम्बन्ध

नेताजी सर्वश्री आनंद मोहन सहाय, कैप्टेन रावत ADC तथा कर्नल DS राजू के साथ 29 दिसम्बर,1943 को पोर्ट ब्लेयर गये थे। नेताजी ने इंडियन नेशनल आर्मी जनरल AD लोगनाथन को इन द्वीपों का गवर्नर नियुक्त किया था।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने इन द्वीपों को अपने नियंत्रण में ले लिया था। नेताजी ने 30 दिसम्बर, 1943 को पोर्ट ब्लेयर में झंडा फहराया था। नेताजी मानते थे कि पोर्ट ब्लेयर ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र होने वाला पहला क्षेत्र था। नेताजी ने अंडमान व निकोबार द्वीप का नाम शहीद और स्वराज द्वीप रखने का सुझाव दिया था।

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