करेंट अफेयर्स– दिसंबर, 2018

सदैव अटल : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्मारक का उद्घाटन किया गया

25 दिसम्बर, 2018 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्मारक का उद्घाटन किया गया। इस स्मारक का नाम “सदैव अटल” रखा गया है। इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि समर्पित की।

इस स्मारक का प्रबंधन लोक सभा स्पीकर की अध्यक्षता में एक ट्रस्ट द्वारा किया जायेगा। यह स्मारक लगभग 1.5 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस स्मारक के लिए अटल समृति न्यास सोसाइटी द्वारा फण्ड फण्ड प्रदान किये गये हैं, इसका निर्माण केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया है। इस स्मारक के निर्माण की लागत 10.51 करोड़ रुपये है।

अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मी बाई कॉलेज) से स्नातक की पढाई की। इसके बाद DAV कॉलेज कानपूर से उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में M.A. की डिग्री प्राप्त की। शुरू में आर्य समाज से जुड़े थे। 1939 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जुड़े और प्रचारक बने। अटल बिहारी वाजपेयी ने युवावस्था में ही स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने शुरू किया, भारत छोडो आन्दोलन में अटल बिहारी वाजपेयी और उनके बड़े भाई प्रेम को 23 दिनों के लिए कारागार में डाला गया था।

1977 के आम चुनावों में जनता पार्टी की जीत के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को मोरारजी देसाई के मंत्रीमंडल में विदेश मंत्री का पद दिया गया था। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था, वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति थे। 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवानी और भैरों सिंह शेखावत ने भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वे पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने, हालांकि उनका कार्यकाल केवल 13 दिन का था। दूसरी बार वे 1998 से 1999 के बीच 11 महीने के लिए प्रधानमंत्री बने। 1999 से 2004 के बीच वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। इसके अलावा वे मोरारजी देसाई की कैबिनेट में विदेश मंत्री भी रहे।

अटल बिहारी वाजपेयी लगभग 4 दशक तक भारतीय संसद के सदस्य थे, वे 10 बार लोकसभा के सदस्य तथा 2 बार राज्यसभा के सदस्य चुने गये। 2009 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से सक्रीय राजनीती से सन्यास लिया।

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संगीता वर्मा को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया

पूर्व भारतीय आर्थिक सेवा (IES) अधिकारी संगीता वर्मा को हाल ही में प्रतिस्पर्धा आयोग का नया सदस्य नियुक्त किया गया है। वे पांच वर्ष तक अथवा अगले आदेश आने तक इस आयोग की सदस्य बनीं रहेंगी। अब भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की सभी रिक्तियां भर ली गयी हैं। वर्तमान में भारतीय प्रतिस्पर्धा के चेयरपर्सन अशोक कुमार गुप्ता हैं तथा इसके सदस्य संगीता वर्मा, ऍगस्टीन पीटर व यू.सी. मेहता हैं। अप्रैल में केन्द्रीय कैबिनेट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के सदस्यों की संख्या को 6 से घटाकर 3 कर दिया था।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India)

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक संस्था है, इसकी स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत की गयी थी। इसकी स्थापना अक्टूबर, 2003 में हुई थी, इसने मई, 2009 में पूर्ण रूप से कार्य करना शुरू किया था। प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के अनुसार इस आयोग का एक अध्यक्ष तथा न्यूनतम दो तथा अधिकतम 6 सदस्य होंगे। वर्तमान में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के 4 सदस्य तथा एक अध्यक्ष हैं। यह आरम्भ से कॉलेजियम के रूप में कार्य कर रहा है। यह आयोग कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को बुरे तरीके से प्रभावित करने वाले कारकों को रोकथाम, ग्राहकों के हितों की सुरक्षा तथा मुक्त व्यापार सुनिश्चित करना है। यह किसी संवैधानिक संस्था को प्रतिस्पर्धा सम्बन्धी मामले में अपनी राय भी प्रदान करता है। यह आयोग प्रतिस्पर्धा सम्बन्धी मामले में जागरूकता फैलाने का कार्य भी करता है।

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