करेंट अफेयर्स– दिसंबर, 2018

दक्षिण एशिया में उर्जा सेक्टर पर विश्व बैंक की रिपोर्ट : मुख्य बिंदु

हाल ही में विश्व बैंक में दक्षिण एशिया में उर्जा सेक्टर के सन्दर्भ में “In the Dark : How Much Do Power Sector Distortions Cost South Asia” नामक रिपोर्ट जारी की, इस रिपोर्ट के अनुसार भारत के उर्जा क्षेत्र में कुशलता की कमी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रतिवर्ष लगभग जीडीपी का 4% नुकसान होता है, वित्त वर्ष 2016 में यह नुकसान 86 अरब डॉलर था।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • यदि 24 घंटे बिजली की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए तो भारत में ग्रामीण गृहस्थों की आय में 9.4 अरब डॉलर की वृद्धि होगी तथा 22.7 अरब डॉलर का व्यापारिक घाटा समाप्त किया जा सकता है।
  • वित्त वर्ष 2016 में भारतीय की कोयला मांग में 14% की कमी थी।
  • अकुल्शल विद्युत् उत्यादं, ट्रांसमिशन तथा वितरण भारत में उर्जा की कमी का मुख्य कारण हैं।
  • 2016 में कुल उत्पादित उर्जा का 20% हिस्सा केवल अकुशल ट्रांसमिशन तथा वितरण के कारण बर्बाद हो गया, इस दर विश्व में सर्वाधिक है।
  • किसानों तथा घरेलु उपयोग के लिए सब्सिडी दिए जाने के कारण व्यापारिक विद्युत् दर काफी अधिक हो जाती है।
  • भारत में कृषि के लिए विद्युत् के उपयोग पर सब्सिडी दी जाती है, जिस कारण भारत विश्व का सबसे बड़ा भूमिगत जल का उपभोक्ता बन गया है। 1950 से 2014 के बीच भारत में भूमिगत जल के उपयोग में लगभग 700% की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें

  • इस रिपोर्ट के अनुसार उर्जा क्षेत्र में सुधार से बाज़ार मूल्य तथा कुशलता में भी सुधार आएगा। इससे विद्युत् आपूर्ति में वृद्धि होगी तथा सभी को विद्युत् की सुविधा मिल सकेगी।
  • सभी लोगों को विद्युत् की सुविधा प्राप्त होने से भारत में लिंग भेद में भी कमी आएगी, इससे महिलाओं को रोज़गार के अधिक अवसर प्राप्त होंगे तथा बालिकाओं को अध्ययन पर सभी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे केरोसिन के उपयोग में कमी आएगी, जिससे स्वास्थ्य तथा पर्यावरण में भी बेहतरी होगी।
  • कोयला आबंटन तथा डिलीवरी में कुशलता प्राप्त करने के लिए प्रयास किये जाने चाहिए।
  • कुशल उर्जा उत्पादन तथा डिलीवरी के लिए इंसेंटिव दिए जाने चाहिए।

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केंद्र सरकार ने लांच किया एशियाई शेर संरक्षण प्रोजेक्ट

केन्द्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हाल ही में “एशियाई शेर संरक्षण प्रोजेक्ट” लांच किया। इसका उद्देश्य एशियाई शेर की जनसँख्या में वृद्धि करना तथा इन शेरों से सम्बंधित पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है।

इस प्रोजेक्ट के लिए 3 वर्ष की अवधि के लिए 9784 लाख रुपये का बजट निश्चित किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार की वन्यजीव प्राकृतिक आवास विकास (CSS-DWH) योजना के तहत फंडिंग प्रदान की जायेगी। इस प्रोजेक्ट की लागत का वहन  केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा 60:40 अनुपात में किया जायेगा।

एशियाई शेर

  • IUCN की रेड लिस्ट में एशियाई शेर को “संकटग्रस्त” जीवों की सूची में रखा गया है।
  • भारत में एशियाई शेर मुख्य रूप से गुजरात में ही पाए जाते हैं।
  • केन्द्र व राज्य सरकारों के प्रयासों से एशियाई शेरों की जनसँख्या को 50 से 500 तक पहुँचाया गया है।
  • 2015 की गणना के अनुसार गिर सुरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में 523 एशियाई शेर हैं।
  • गिर सुरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में गिर राष्ट्रीय उद्यान, गिर वन्यजीव अभ्यारण्य, पनिया अभिरान्य, मितियाला अभ्यारण्य तथा निकटवर्ती क्षेत्र हैं, इसक कुल क्षेत्रफल 1,648.79 वर्ग किलोमीटर है।

इस प्रोजेक्ट के तहत एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवास में सुधार किया जायेगा तथा इन शेरों के रोग नियंत्रण के लिए कार्य किया जायेगा तथा स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जायेंगी।

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