करेंट अफेयर्स– दिसंबर, 2018

प्रधानमंत्री मोदी ने महाराज सुहेलदेव की स्मृति में जारी की स्टैम्प

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराज सुहेलदेव की स्मृति में एक स्टैम्प जारी की। उन्होंने महाराज सुहेलदेव को बहादुर योद्धा बताया, जो लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि केंद्र सरकार उन सभी लोगों की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिन्होंने भारत की रक्षा में योगदान दिया है।

महाराज सुहेल देव

महाराज सुहेलदेव का सन्दर्भ कल्पना व इतिहास की सीमा के निकट पाया जाता है। उनके नाम के बारे में इतिहासकार एकमत नहीं हैं, उन्हें साकारदेव, सुहिराध्वज, सुह्रिद्ली, सुहरीदल-धज, राय सुहरिद देव, सुसज, सुहरदल इत्यादि नामों से जाना जाता है।

फ़ारसी पुस्तक मिरात-ए-मसूदी में उनके बारे में जानकारी मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि महाराज सुहेलदेव ने गजनी के जनरल गाजी सईद सलार मसूद को 11वीं शताब्दी में बहराइच में पराजित किया था।

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प्रधानमंत्री मोदी ने किया अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसन्धान केंद्र के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसन्धान केंद्र के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (IRRI SARC) का उद्घाटन किया। यह IRRI SARV का 6वां कैंपस है। यह संस्थान 2022 तक किसानों की आयु को दोगुना करने में लाभदायक सिद्ध होगा।

अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसन्धान केंद्र के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (IRRI SARC)

  • इस संस्थान के शिक्षा व प्रशिक्षण अनुभाग द्वारा वैज्ञानिकों तथा कृषि लीडर्स को नवीन कृषि तकनीकों तथा सतत कृषि के बारे में शिक्षा प्रदान की जायेगी।
  • IRRI SARC में फसल की डिजिटल मॉनिटरिंग व मूल्यांकन के लिए प्रयोगशालाएं उपलब्ध होंगी।
  • इस संस्थान में चावल की विभिन्न किस्मों के परीक्षण के लिए प्रदर्शन क्षेत्र की व्यवस्था होगी।
  • इस संस्थान में चावल के मूल्य संवर्धन के लिए सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की व्यवस्था है, इसमें आधुनिक प्रयोगशाला की व्यवस्था होगी जहाँ पर चवन की गुणवत्ता तथा पोषक तत्वों का अध्ययन किया जा सकता है।

लाभ

  • यह संस्थान दक्षिण एशिया व सार्क क्षेत्र में चावल अनुसन्धान व प्रशिक्षण के लिए हब के रूप में कार्य करेगा।
  • यह संस्थान फसल उत्पादन, बीज की गुणवत्ता तथा पोषक गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
  • यह केंद्र किसानों के ज्ञान में वृद्धि करने तथा उनकी आया में वृद्धि करने के लिए किसानों तक अपने शोध कार्य को पहुँचायेगा।
  • यह केंद्र चावल की खेती करने वाले किसानों के जीवन यापन को बेहतर करने तथा कुपोषण इत्यादि की समस्या को दूर करने के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

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