करेंट अफेयर्स – फरवरी, 2019

इजरायली कंपनी ने विश्व का पहला निजी फंडिंग द्वारा समर्थित मिशन चन्द्रमा के लिए भेजा

स्पेस एक्स के फाल्कन 9 राकेट ने SpaceIL के लूनर लैंडर के साथ फ्लोरिडा से उड़ान भरी। यदि यह मिशन सफल रहता है तो इजराइल रूस, अमेरिका और चीन जैसे देशों की सूची में शामिल हो जायेगा जिन्होंने चन्द्रमा की सतह पर सफल नियंत्रित लैंडिंग की है।

इजराइल का चन्द्रमा मिशन

  • गौरतलब है कि इस मिशन की फंडिंग दान की गयी राशि से की गयी है, यह विश्व का पहला निजी लूनर लैंडर मिशन है। इस प्रोजेक्ट की लागत 100 (लगभग 700 करोड़ रुपये) है।
  • स्पेसक्राफ्ट का नाम बेरेशीट रखा गया है, इसका भार 585 किलोग्राम है।
  • यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर पहुँच कर वहां के चट्टानी धरातल की तस्वीरें भेजेगा तथा चन्द्रमा के चुम्बकीय क्षेत्र पर प्रयोग भी करेगा।
  • हिब्रू भाषा में बाइबिल के पहले शब्द “शुरुआत में” के सन्दर्भ में इस स्पेसक्राफ्ट का नाम बेरेशीट रखा गया है।

चन्द्रमा पर लैंडिंग

  • सबसे पहले सोवियत संघ ने लूना 2 के साथ चन्द्रमा पर 1959 में लैंडिंग की थी।
  • इसके वर्ष बाद अमेरिका ने रेंजर 4 को चन्द्रमा की सतह पर उतारा था।
  • लूना 2 और रेंजर 4 हार्ड लैंडिंग थीं अर्थात इन दोनों स्पेसक्राफ्ट को चन्द्रमा की सतह पर टकराया गया था।
  • अमेरिका और सोवियत संघ ने 1966 में चन्द्रमा पर पहली बार नियंत्रित सॉफ्ट लैंडिंग की।
  • चन्द्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला तीसरा देश चीन है, चीन ने 2013 में चंगेई 3 को चन्द्रमा की सतह पर लैंड किया था।

SpaceIL

SpaceIL एक गैर-लाभकारी कंपनी है, इसकी स्थापना आठ वर्ष पहले गूगल लूनर एक्स प्राइज में हिस्सा लेने के लिए की गयी थी। गूगल लूनर एक्स प्राइज प्रतिस्पर्धा में चन्द्रमा की सतह से हाई डेफिनिशन विडियो भेजना, लाइव ट्रांसमिशन, किसी भी दिशा में 500 मीटर घूमने वाले निजी स्पेसक्राफ्ट के निर्माण शामिल था। परन्तु 2018 में इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था क्योंकि बची हुई पांच टीमों में से कोई भी टीम मार्च तक की डेडलाइन को पूरा नहीं कर सकी।

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गुजरात ने सुजलाम सुफलाम जल संचय अभियान के दूसरे संस्करण को लांच किया

गुजरात ने सुजलाम सुफलाम जल संचय अभियान के दूसरे संस्करण को लांच किया, इस योजना का उद्देश्य जल संचय को बढ़ावा देना है।

सुजलाम सुफलाम जल संचय अभियान

  • इस योजना के तहत मानसून से पहले जल भण्डारण स्थलों को गहरा किया जायेगा, जिससे वे अधिक मात्र में जल को भंडारित कर सकें।
  • इस योजना में रिवरफ्रंट को साफ़ किया जाएगा तथा सिल्ट को वहां से हटाया जायेगा।
  • इस योजना के तहत सिंचाई नहरों को साफ़ किया जायेगा।

राज्य सरकार ने इस योजना के लिए अपने वित्तीय योगदान को बढ़ाकर 60% कर दिया है, अब निजी समूहों को इसमें केवल 40% योगदान ही देना होगा। इस योजना के पहले संस्करण में गुजरात में झीलों व जल स्त्रोतों को गहरा करने के 18,220 कार्य किये गये थे। पहले संस्करण में वर्षा जल भण्डारण क्षमता में 11,000 लाख क्यूबिक फीट की वृद्धि हुई थी।

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