करेंट अफेयर्स - जनवरी, 2019

नवम्बर में भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ 16 माह के न्यूनतम स्तर पर पहुंची

केन्द्रीय व्यापार व उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किये गये डाटा के अनुसार नवम्बर में भारतीय अर्थव्यवस्था के आठ कोर सेक्टर की ग्रोथ नवम्बर में 16 माह के न्यूनतम स्तर 3.5% पर पहुंची। भारतीय अर्थव्यवस्था के आठ कोर सेक्टर हैं : कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट व बिजली।

कोर सेक्टर की वृद्धि

  • केन्द्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी डाटा से निम्नलिखित परिणाम निकाले जा सकते हैं :
  • नवम्बर में भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ 16 माह के न्यूनतम स्तर 3.5% पर पहुंची, अक्टूबर में यह दर 4.8% थी।
  • नवम्बर में सीमेंट उत्पादन की वृद्धि दर  लगभग आधी हो गयी।
  • इस दौरान कोयला उत्पादन 3.7% रहा, यह तीन माह का न्यूनतम स्तर है।
  • नवम्बर में विद्युत् उत्पादन की वृद्धि दर आधी होकर 5.4% रह गयी।
  • कच्चे तेल के उत्पादन में 3.5% की कमी आई है।
  • प्राकृतिक गैस उत्पादन में 0.5% की वृद्धि हुई है।
  • उर्वरक क्षेत्र में 8% की कमी आई है।

कोर उद्योग

कोर उद्योग वह उद्योग होते हैं जो किसी अभी अर्थव्यवस्था के मुख्य उद्योग होते हैं और अर्थव्यवस्था में उनका हिस्सा काफी बड़ा होता है। भारत में आठ कोर उद्योग हैं : कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट व बिजली। यह कोर उद्योग औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक का 40.27% हिस्सा हैं।

कोर सेक्टर का भार : पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद (28.04%), विद्युत् उत्पादन (19.85%), स्टील उत्पादन (17.92%), कोयला उत्पादन (10.33%), कच्चा तेल उत्पादन (8.98%), प्राकृतिक गैस उत्पादन (6.88%), सीमेंट (5.37%), उर्वरक (2.63%)।

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पैनल ने दिया 2020 से नए इंजीनियरिंग कॉलेज न खोलने का सुझाव

IIT हैदराबाद के चेयरमैन BVR मोहन रेड्डी की अध्यक्षता वाले पैनल ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (AICTE) को 2020 से नए इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना को मंज़ूरी न देने का सुझाव दिया है।

पैनल की सिफारिशें

  • 2020 से नए इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना को मंज़ूरी न दी जाए, तत्पश्चात प्रत्येक दो वर्ष के बाद नई क्षमता की समीक्षा की जाए।
  • मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे परंपरागत इंजीनियरिंग क्षेत्रों में अतिरिक्त सीटों को मंज़ूरी न दी जायेगी। इसके साथ-साथ संस्थानों को पारंपरिक इंजीनियरिंग क्षेत्र की बजाय नई उभरती हुई तकनीकों को बल देने का सुझाव दिया गया है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, डाटा साइंस, साइबर सुरक्षा तथा 3डी प्रिंटिंग व डिजाईन के लिए विशेष रूप से अंडर-ग्रेजुएट कार्यक्रम शुरू किये जाएँ।

इन सिफारिशों के कारण

  • वर्तमान में पारंपरिक इंजीनियरिंग में कुल क्षमता का 40% हिस्सा उपयोग हो गया है, जबकि कंप्यूटर साइंस व इंजिनियर, एरोस्पेस इंजीनियरिंग व मैकेनोट्रोनिक्स में 60% क्षमता का उपयोग किया जा रहा है।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक 2016-17 में 3,291 इंजीनियरिंग कॉलेज में बी.ई./बी.टेक की 15.5. लाख सीटों में से 51% सीटों के लिए उम्मीदवारों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।

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