करेंट अफेयर्स - जनवरी, 2019

भारतीय सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम रिपोर्ट 2018 : मुख्य बिंदु

हाल ही में कोच्ची बेस्ड सूक्ष्म उद्यम व विकास संस्थान ने बंगलुरु में साउथ इंडिया MSME (सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम)समिट 2019 में भारतीय सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम रिपोर्ट 2018 को जारी किया।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • समस्याओं के समाधान तथा क्षमता के पूर्ण उपयोग के लिए MSME के लिए आधारभूत सुधार करने होंगे।
  • सरकार को MSME संघ द्वारा वित्त तथा कर से सम्बंधित समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करने की आवश्यकता है।
  • MSME के समस्याओं के लिए दीर्घकालीन समाधान ढूँढने की आवश्यकता है।
  • इस रिपोर्ट में MSME के लिए एक वैज्ञानिक फ्रेमवर्क के तहत साझा राष्ट्रीय अजेंडे पर कार्य करने की अनुशंसा की गयी है।
  • इस रिपोर्ट में MSME उद्योगों की समस्याओं को चिन्हित करने तथा उनके विश्लेषण की मांग की गयी है।

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सर्वोच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति व जनजाति (क्रूरता रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2018 में संशोधन पर रोक लगाने से इनकार किया

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति व जनजाति (क्रूरता रोकथाम) संशोधन बिल, 2018 में संशोधन पर रोक लगाने से इनकार किया। यह संशोधन इस अधिनियम के दुरूपयोग को रोकने के लिए लाये गये थे।

प्रस्तावित संशोधन

अनुसूचित जाति व जनजाति (क्रूरता रोकथाम) अधिनियम के कई प्रावधानों के दुरूपयोग पर चिंता ज़ाहिर करने हुए सर्वोच्च न्यायालय ने निम्नलिखित सुरक्षा मैकेनिज्म का सुझाव दिया था :

  • अग्रिम ज़मानत की व्यवस्था
  • अधिनियम के तहत आरोपी की गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अनुमति
  • केस की प्रारंभिक छानबीन डिप्टी पुलिस अधीक्षक द्वारा की जायेगी

अनुसूचित जाति व जनजाति (क्रूरता रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2018

अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (क्रूरता रोकथाम) अधिनियम, 1989 के द्वारा उपेक्षित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रावधान किये गए हैं। अनुसूचित जाति व जनजाति के विरुद्ध अपराधों के लिए एक विशेष ट्रायल कोर्ट की स्थापना की गयी है।

इस बिल के अनुसार आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए जांच अधिकारी को किसी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा आरोपी पर FIR दायर करने के लिए प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है। इस अधिनियम के तहत आरोपी व्यक्ति को अग्रिम ज़मानत नहीं दी जा सकती।

इस अधिनियम का उद्देश्य उपेक्षित वर्ग को न्याय दिलाना है। इस अधिनियम में 22 अपराध की सूची हैं, जिनसे अनुसूचित जाति व जनजाति के आत्म सम्मान को ठेस पहुँच सकती है। यदि किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के तहत दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कारवाई अमल में लायी जाती है।

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