करेंट अफेयर्स - जुलाई, 2018

STA-1 : भारत बना विशिष्ट अमेरिकी तकनीक प्राप्त करने वाला पहला दक्षिण एशियाई देश

अमेरिका ने भारत को Strategic Trade Authorization 1 (STA-1) देश चिन्हित किया है, इसके द्वारा भारत को अमेरिका से अत्याधुनिक तकनीक प्राप्त करने की अनुमति मिल गयी है। यह विशिष्ट स्टेटस अमेरिका द्वारा नाटो तथा निकट सहयोगियों को दिया गया है। भारत इस स्टेटस को प्राप्त करने वाला पहला देश दक्षिण एशियाई है, एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया को यह स्टेटस प्राप्त है।

मुख्य बिंदु

STA-1 के तहत अमेरिका  भारत को लाइसेंस मुक्त कई महत्वपूर्ण तकनीके प्रदान करेगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में मजबूती आएगी और भारत में अमेरिकी आयात में वृद्धि होगी। इसके साथ भारत चार में तीन बहुपक्षीय निर्मात नियंत्रण व्यवस्था में शामिल हो गया है। इससे अमेरिकी कंपनियां अधिक कुशलतापूर्वक भारत में विभिन्न उत्पादों का निर्यात कर सकती हैं। इससे अमेरिकी निर्माताओं को लाभ होगा तथा वे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाये रख सकते हैं ।

इससे भारत की आपूर्ति श्रृंखला में कुशलता आएगी, इससे रक्षा व अन्य अत्याधुनिक तकनीकें भारत में आ सकेंगी। इससे भारत और अमेरिका के व्यापारिक सम्बन्ध भी मज़बूत होंगे।

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स्कुटोइड : वैज्ञानिकों ने की कोशिका के नए आकार की खोज

वैज्ञानिकों ने एपिथेलियल कोशिकाओं के अध्ययन के दौरान कोशिका के नए आकार की खोज की। एपिथेलियल उत्तक उन चार उत्तकों में से एक है जो शरीर के लिए सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह मानव शरीर की सेल वाल लाइनिंग का निर्माण करते हैं। स्कुटोइड आकार में एक ओर 5 किनारे और दूसरी ओर 6 किनारे होते है, जबकि लम्बे किनारे की ओर त्रिकोणीय क्षेत्र होता है।

मुख्य बिंदु

वैज्ञानिकों ने इस आकार की पहचान करने के लिए कंप्यूटर मॉडलिंग व इमेजिंग की सहायता ली। इससे एक विचित्र आकार उत्पन्न हुआ जो कुछ हद तक प्रिज्म की तरह लगता है। इसमें एक ओर 5 किनारे और दूसरी ओर 6 किनारे होते है, जबकि लम्बे किनारे की ओर त्रिकोणीय क्षेत्र होता है।

जैसे-जैसे उत्तक और अंगों और निर्माण होता है, एपिथेलियल कोशिकाएं इकठ्ठा होती जाती हैं और यह घुमाव के साथ जटिल 3D स्कुटोइड आकार में ढल जाती हैं। यह मानव शरीर में माइक्रोब को प्रवेश करने से रोकती हैं। स्कुटोइड कोशिकाओं के खोज से इनके व्यवस्थित होने की प्रक्रिया का पता लगाना संभव हो पायेगा। इसके अलावा यह उत्तक इंजीनियरिंग के लिए भी काफी उपयोगी है, इससे कृत्रिम अंग निर्माण में सहायता मिलेगी।

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