करेंट अफेयर्स - जुलाई, 2018

लोकसभा ने पारित किया राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् (संशोधन) बिल, 2017

लोक सभा ने राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (संशोधन) बिल, 2017 पारित किया। इससे उन शिक्षण संस्थानों को मान्यता दी जाएगी जिन्हें केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा फण्ड दिए जाते हैं, परन्तु उन्हें मान्यता प्राप्त नहीं है। इस बिल से राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् अधिनियम, 1993 में संशोधन किया गया।

बिल की मुख्य विशेषताएं

शिक्षक शिक्षा संस्थानों को पूर्वव्यापी (retrospective) मान्यता : इस बिल के द्वारा उन सभी संस्थानों को मान्यता दी जाएगी जिन्हें केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है, परन्तु उन्हें मान्यता नहीं दी है। इसमें केवल उन्ही शिक्षण संस्थानों को शामिल किया जायेगा जिन्होंने शैक्षणिक वर्ष 2017-18 से पहले शिक्षक शिक्षा के कोर्स चलाये हों।

नए कोर्स शुरू करने की पूर्वव्यापी आज्ञा : इस बिल के द्वारा इन शिक्षक शिक्षा संस्थानों को ने कोर्स शुरू करने की आज्ञा भी प्रदान की गयी है।

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् (National Council for Teacher Education)

यह केंद्र सरकार की एक वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 1995 में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् अधिनियम, 1993 द्वारा की गयी थी। इसका मुख्य कार्य भारतीय शिक्षा प्रणाली के मानक व प्रक्रियाओं इत्यादि का अवलोकन करना है। NCTE शिक्षक शिक्षा के विकास के लिए योजनायें निर्मित करता है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित हैं।

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लोक सभा ने पारित किया परक्राम्य लिखत (संशोधन) बिल, 2017

लोकसभा ने न्यायालयों में चेक अनादरण के मामलों में कमी लाने के लिए परक्राम्य लिखत (संशोधन) बिल, 2017 पारित किया। इस बिल से परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 में संशोधन किया गया।

परक्राम्य लिखत (Negotiable Instrument)

परक्राम्य लिखत से अभिप्राय उन कानूनी दस्तावेजों से है जिनका उपयोग धारक को भुगतान करने के लिए किया जा सकता है, इसमें चेक, प्रामिसरी नोट तथा बिल ऑफ़ एक्सचेंज इत्यादि शामिल हैं। परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 में चेक, प्रामिसरी नोट तथा बिल ऑफ़ एक्सचेंज को परिभाषित किया गया है। चेक बाउंस होने अथवा परक्राम्य लिखत के सम्बन्ध में किसी उल्लंघन के लिए इसमें दंड का प्रावधान भी किया गया है।

बिल की मुख्य विशेषताएं

अंतरिम मुआवजा : इस बिल के मूल अधिनियम ने एक नया सेक्शन 143 A बनाया गया है, इसके अनुसार चेक बाउंस के मामले में चेक देने वाले व्यक्ति को धारक को मुआवजा देना होगा। यह मुआवजा चेक में लिखित राशि का 20% से अधिक नहीं हो सकता। यह मुआवजा ट्रायल कोर्ट के आदेश के 60 अन्दर देना होगा।

अपील : अपील के सम्बन्ध में इस अधिनियम में एक और सेक्शन 148 A जोड़ा गया है, इसके अनुसार चेक लिखने वाला व्यक्ति दोषी करार दिए जाने के बाद अपील दायर कर सकता है। अपीलीय न्यायालय उसे न्यूनतम जुर्माने की 20% राशी जमा करने के लिए कह सकता है, यह राशी अंतरिम मुआवज़े से अलग होगी।

अंतरिम मुआवज़े की वापसी  : यदि ट्रायल कोर्ट या अपीलीय न्यायालय द्वारा चेक लिखने वाले व्यक्ति को दोष मुक्त करार दिया जाता है, तो न्यायालय द्वारा धारक को अंतरिम मुआवज़े राशि (अपील के मामले में 20% जमा राशी) ब्याज के साथ वापस करने के आदेश दिया जायेगा। यह राशी न्यायालय के आदेश के 60 दिन के भीतर चेक लिखने वाले को वापस करनी होगी।

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