करेंट अफेयर्स - जुलाई, 2018

सरकार ने जारी किया डीप ओशन मिशन का ब्लूप्रिंट

केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने हाल ही में डीप ओशन मिशन का ब्लूप्रिंट जारी किया। इस मिशन का उद्देश्य गहरे सागर में खोज कार्य में सफलता प्राप्त करना है। इस अभियान के लिए केंद्र ने पंचवर्षीय योजना बनायी है, इस योजना की लागत लगभग 8000 करोड़ रुपये आएगी। इस अभियान में गहन सागर उत्खनन, जलमग्न वाहन, जलमग्न रोबोटिक्स, सागरीय जलवायु परिवर्तन इत्यादि के सम्बन्ध में कार्य किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

भारत की विशिष्ठ आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) 2.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, इसमें भारत का विशाल समुद्री क्षेत्र शामिल है, जिसका अभी तक दोहन नहीं हो सका है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र प्राधिकरण (UN-ISBA) द्वारा पॉलीमेटलिक नोड्युल के दोहन के लिए केन्द्रीय हिन्द महासागर बेसिन में भारत को 1,50,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आबंटित किया गया है। इन चट्टानों में लोहा, निकल, मेग्नीज़ और कोबाल्ट जैसी धातुएं पायी आती है। एक अनुमान के अनुसार केन्द्रीय हिन्द महासागर बेसिन में लगभग 380 मिलियन मीट्रिक टन पॉलीमेटलिक नोड्युल का भंडार है।

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शिलॉन्ग में लांच किया गया मेघालय मिल्क मिशन

मेघालय दुग्ध अभियान को शिलॉन्ग में लांच किया गया। 215 करोड़ रुपये की इस योजना को केन्द्रीय कृषि व परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वीकृत किया था। इस धन राशी को डेरी फार्म व शीत केंद्र में प्रशिक्षण तथा दुधारू पशु खरीदने के लिए उपयोग किया जायेगा।

मेघालय मिल्क मिशन

दूध की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को कम करने के लिए इस योजना को शुरू किया जा रहा है। मेघालय में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता भारतीय मेडिकल अनुसन्धान परिषद् द्वारा निश्चित किये गए स्तर से काफी है। इस योजना से केंद्र की 2022 तक किसानो की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा मेघालय को लोगों को दुग्ध क्षेत्र में अतिरिक्त रोज़गार की प्राप्ति भी होगी। अगले चार वर्षों में लगभग 2000 किसान इस योजना से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे। इस प्रकार मेघालय अपनी दुग्ध आवश्यकता को स्वयं ही पूरा कर सकेगा।

इस परियोजना में 2000 डेरी फार्म इकाइयां शामिल हैं, प्रत्येक इकाई में 4 गायें खरीदने की व्यवस्था है, इसके अतिरिक्त शेड निर्माण, स्टोरेज कक्ष, पशु बीमा, 3000 लीटर की क्षमता युक्त 13 दूध के टैंकर, 500 लीटर क्षमता युक्त 79 मिल्क कूलर भी इसमें शामिल हैं। इसके अलावा किसानों के लिए 1 करोड़ रुपये की लागत से प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी।

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