करेंट अफेयर्स - जुलाई, 2018

NASAMS-II: भारत को अमेरिका से जल्द मिल सकती है यह अत्याधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणाली

भारत अमेरिका से National Advanced Surface-to-Air Missile System-II (NASAMS-II) प्राप्त करने के लिए वार्ता कर रहा है। इस हवाई सुरक्षा प्रणाली की कीमत 1 अरब डॉलर है (लगभग 6800 करोड़ रुपये) है, इसका उपयोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की हवाई सुरक्षा के लिए किया जायेगा। फिलहाल यह प्रस्ताव Acceptance of Necessity (AoN) स्टेज में है। इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद् (Defence Acquisition Council) द्वारा स्वीकृति दी गयी थी।

मुख्य बिंदु  

NASAMS-II, NASAMS का अपग्रेड किया गया संस्करण है, इसे रेथीऑन ने नॉर्वे की कोंग्सबर्ग डिफेन्स एंड एयरोस्पेस के साथ साझेदारी में विकसित किया था। यह सुरक्षा प्रणाली 2007 से कार्य कर रही है। इसमें 3D मोबाइल राडार और तीव्र प्रतिक्रिया के लिए 12 मिसाइल लांचर भी शामिल किये गए हैं।

यह एक मध्यम रेंज में कार्य करने वाली सुरक्षा प्रणाली है। यह एक अत्याधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणाली है। यह दुश्मन मिसाइल, UAV अथवा लड़ाकू विमान का शीघ्रता से पता लगाकर जवाबी कारवाई करने में सक्षम है।

इस हवाई सुरक्षा प्रणाली में 3डी सेंटिनल राडार, छोटी व मध्यम रेंज के मिसाइल लांचर, कमांड-एंड-कण्ट्रोल इकाई शामिल है। यह शीघ्रता से किसी भी हवाई खतरे से निपटने में सक्षम है। इस हवाई सुरक्षा प्रणाली का उपयोग अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। यह प्रणाली कई अन्य नाटो देशों में भी उपयोग की जा रही है।

भारत के लिए महत्व  

NASAMS-II हवाई सुरक्षा प्रणाली से सुसज्जित होने के बाद 9/11 जैसी घटनाएँ रोकी जा सकेंगी। इसके अतिरिक्त भारत द्वारा कई अन्य छोटी व मध्यम रेंज के मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए प्रयासरत है, NASAMS-II और इन मिसाइल सिस्टम का उपयोग भारत की हवाई सुरक्षा के लिए काफी महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। इस प्रणाली को प्राप्त करने के बाद भारत उन चुनिन्दा देशों की श्रेणी में शामिल हो जायेगा जिनके पास अपनी राजधानी को सुरक्षित रखने के लिए मिसाइल सुरक्षा प्रणाली है। यह प्रणाली अमेरिका, रूस और इजराइल जैसे देशों के पास है।

पृष्ठभूमि

दुश्मन मिसाइल, UAV और लड़ाकू विमानों  से देश को सुरक्षित रखने के लिए भारत बहु-स्तरीय हवाई सुरक्षा प्रणाली स्थापित कर रहा है। इसके लिए भारत रूस के साथ लम्बी दूरी के S-400 हवाई मिसाइल सुरक्षा सिस्टम को प्राप्त करने के लिए वार्ता कर रहा है। इसके अलावा रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) देश में द्वि-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा प्रणाली विकसित करने के अंतिम चरण में पहुँच गया है, यह सुरक्षा प्रणाली पृथ्वी के वातावरण के अन्दर व बाहर दोनों तरफ परमाणु मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखती है।

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संकटग्रस्त थर्मल प्लांट्स को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने किया उच्च स्तरीय समिति का गठन

केंद्र सरकार ने संकटग्रस्त थर्मल प्लांट (तापीय उर्जा सयंत्र) प्रोजेक्ट्स को पुनर्जीवित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का गठन कैबिनेट सचिव द्वारा किया जायेगा। इस समिति में रेल मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, उर्जा मंत्रालय, कोयला मंत्रालय तथा उर्जा क्षेत्र के प्रमुख ऋणदाताओं के प्रतिनिधि शामिल हैं।

मुख्य बिंदु

यह समिति विभिन्न मुद्दों का अवलोकन करेगी, तथा तापीय उर्जा में निवेश का कुशलतापूर्वक उपयोग करने के लिए उपाय सुझाएगी। इसके अलावा इंधन वितरण, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, उर्जा का विक्रय, समय पर भुगतान इत्यादि बिन्दुओं पर भी चर्चा की जाएगी। अभी तक तापीय उर्जा क्षेत्र में काफी सारी परिसंपत्ति व निवेश का उपयोग कुशलतापूर्वक नहीं हो पाया है। आगे चल कर तापीय उर्जा में NPA में वृद्धि न हो और निवेश का उपयोग किया जाए, यह इस समिति द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में उच्च स्तरीय पैनल के गठन का सुझाव दिया था। इसके अलावा जो थर्मल प्लांट दिवालिया होने की समस्या से नहीं जूझ रहे थे, उन्हें अन्य समस्याओं के समाधान के लिए 6 महीने का समय दिया गया था। यह रिपोर्ट जून 2018 में प्रस्तुत की गयी थी जब इलाहबाद उच्च न्यायालय ने उर्जा उत्पादकों की बात सुने बिना कोई भी एक्शन न लेने का आदेश दिया था।

उर्जा उत्पादकों ने भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा फरवरी 2018 में जारी किये गये उस सर्कुलर को चुनौती दी थी, जिसमे दिवालियापन की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए सख्त टाइमलाइम प्रस्तुत की गयी थी। इसके तहत बैंकों को 1 दिन देर होने पर ही ऋण सेवा को डिफ़ॉल्ट करार देने के लिए कहा गया था।

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