करेंट अफेयर्स – जुलाई, 2019

सरकार ने 100 दिन के भीतर वक्फ बोर्ड की सम्पति के डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखा

केंद्र सरकार ने देश भर में वक्फ बोर्ड की संपत्ति के डिजिटलीकरण के लिए 100 दिन की समय सीमा निश्चित की है। यह घोषणा केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी द्वारा की गयी।

मुख्य बिंदु

इस लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए जियोग्राफिक इनफार्मेशन सिस्टम (GIS) मैपिंग का उपयोग किया जा रहा है।

कारण : भारत सरकार का उद्देश्य वक्फ बोर्ड की अधोसंरचनात्मक तथा वित्तीय स्थिति को सुधारना है, जिससे कि वक्फ संपत्ति का उपयोग मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए किया जा सके और इन संपत्तियों पर अवैध कब्ज़े पर रोक लग सके।

केंद्र सरकार शिक्षा तथा विकास कार्यक्रमों के लिए वक्फ बोर्ड के लिए 100% फंडिंग प्रदान कर रही है।

वक्फ बोर्ड क्या है?

वक्फ का शाब्दिक अर्थ है “अवरोध”। इससे तात्पर्य चल व अचल संपत्ति से है, जिससे प्राप्त होने वाली आय का उपयोग धार्मिक तथा परोपकार कार्य के लिए किया जाता है। जब वक्फ का निर्माण किया जाता है तो संपत्ति का अवरोध किया जाता है, इसके बाद यह संपत्ति गैर-हस्तांतरणीय बन जाती है। वक्फ अधिनियम, 1954 के तहत  भारत सरकार ने 1964 में वक्फ परिषद् की स्थापना की थी।

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IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने पैरालाइज्ड स्ट्रोक से पीड़ित लोगों के लिए दो ऊँगली वाले रोबोटिक हाथ का निर्माण किया  

IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने दो ऊँगली वाले रोबोटिक हाथ का निर्माण किया है, इससे पैरालाइज्ड स्ट्रोक से पीड़ित लोगों को काफी सहूलियत होगी। इस कार्य के लिए प्रोफेसर आशीष दत्ता तथा प्रोफेसर के.एस. वेंकटेश ने अपने अध्यापक गिरिजेश प्रसाद के साथ मिलकर यूनिवर्सिटी ऑफ़ अल्स्टर (यूनाइटेड किंगडम में स्थित) के साथ साझेदारी की। इस डिवाइस का उपयोग रोगी के हाथ पर किया जा सकता है।

यह डिवाइस मस्तिष्क के सिग्नल का उपयोग करती है, इसमें ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफ़ेस का उपयोग किया गया है। इसके द्वारा व्यक्ति अपने अंगूठे तथा उँगलियों का उपयोग कर सकता है, इस डिवाइस में 300 Mhz के MEGA माइक्रोकंट्रोलर का उपयोग किया गया है, इसमें बैटरी का उपयोग किया जाता है। इस डिवाइस की लागत लगभग 15,000 रुपये है।

IIT कानपुर

IIT कानपुर उत्तर प्रदेश में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान है, इसे भारत सरकार द्वारा तकनीक संस्थान अधिनियम के तहत राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित किया गया है। इसकी स्थापना 1959 में की गयी थी। इसका आदर्श वाक्य “तमसो मा ज्योतिर्गमय” है।

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