करेंट अफेयर्स – जुलाई, 2019

वन्दे भारत एक्सप्रेस ने नई दिल्ली से कटरा के बीच ट्रायल रन पूरा किया

भारतीय रेलवे के उत्तरी रेलवे जोन ने हाल ही में वन्दे भारत एक्सप्रेस का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह ट्रायल नई दिल्ली तथा जम्मू-कश्मीर के एक कस्बे कटरा के बीच किया गया। वन्दे भारत ने नई दिल्ली और कटरा के बीच की दूरी को मात्र 8 घंटे में तय किया। गौरतलब है कि यह ट्रेन माता वैष्णो देवी के मंदिर जाने वाले भक्तों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होगी। इस ट्रेन को अगस्त से नई दिल्ली और कटरा के बीच चलाया जा सकता है।

वन्दे भारत एक्सप्रेस

ट्रेन 18 भारत की पहली बिना इंजन की ट्रेन है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया गया है। इस रेल के निर्माण में 100 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह रेल 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस का स्थान लेगी। इस रेल के 80% कल-पुर्ज़े भारत में निर्मित किये गये हैं, यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती है। 2019-20 तक इस प्रकार की 5 अन्य रेलों का निर्माण किया जायेगा।

16 कोच वाले इस प्रोटोटाइप में लोकोमोटिव (इंजन) नहीं है, यह शताब्दी रेल की तुलना में 15% कम समय लेगी। ट्रेन 18 में सेल्फ-प्रोपल्शन मोड्युल का उपयोग किया गया है, यह ट्रेन 160 किलोमीटर की गति से यात्रा करने की क्षमता रखती है। इस ट्रेन में तीव्र गति के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त इस ट्रेन में आटोमेटिक द्वार तथा जीपीएस बेस्ड यात्री सूचना प्रणाली इत्यादि का उपयोग भी किया गया है।
इस रेलगाड़ी का 3-4 दिन तक परीक्षण किया जायेगा। परीक्षण के सफल होने के बाद इस प्रोटोटाइप को रिसर्च डिजाईन एंड स्टैंडर्ड्स आर्गेनाईजेशन (RDSO) को सौंपा जायेगा। शताब्दी ट्रेन को 1988 में शुरू किया गया था, फिलहाल यह 20 मार्गों पर कार्यरत्त है, यह मेट्रो शहरों को अन्य महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ती है।

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कार्यस्थल पर यौन शोषण पर रोकथाम के लिए मंत्री समूह का पुनर्गठन किया गया 

भारत सरकार ने कार्यस्थल पर यौन शोषण पर रोकथाम लगाने के लिए मंत्री समूह का पुनर्गठन किया है, इस मंत्री समूह के अध्यक्ष केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं। यह मंत्री समूह कार्यस्थल पर यौन शोषण पर रोकथाम लगाने तथा कानूनी फ्रेमवर्क को मज़बूत बनाने के लिए कार्य करेगा। इस पुनर्गठित मंत्री समूह के नया सदस्य हैं : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी।

इससे पहले अक्टूबर, 2018 में कार्यस्थल पर यौन शोषण को रोकने तथा कानूनी फ्रेमवर्क को मज़बूत बनाने के लिए मंत्री समूह का गठन किया गया था। उस मंत्री समूह का गठन केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में किया गया था। इसका मुख्य कारण  #MeToo के तहत सामने आये यौन शोषण के मामले हैं।

#MeToo आन्दोलन क्या है?

दरअसल #MeToo आन्दोलन के तहत महिलाएं कार्यस्थल इत्यादि पर उनके साथ हुए अभद्र व्यवहार अथवा शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठा रही हैं। इसकी शुरुआत अक्टूबर, 2017 में हुई थी, जब यह हैशटैग (#MeToo) इन्टरनेट पर काफी वायरल हुआ था। अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानों ने 2017 में ट्विटर पर महिलाओं को अपने साथ हुए अभद्र व्यवहार अथवा शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया, उसके बाद इस हैशटैग का उपयोग इन्टरनेट पर बड़े पैमाने पर शुरू हुआ और महिलाओं ने अपने साथ हुई इन दुर्व्यवहार की घटनाओं को साझा करना शुरू हुआ। इसके तहत कई बड़े नेताओं, अभिनेताओं तथा फिल्म निर्देशकों द्वारा किये शारीरिक शोषण के विरुद्ध महिलाएं अपने आवाज़ उठा रही हैं। हाल ही में भारत में भी यह आन्दोलन काफी तीव्रता पकड़ रहा है और अब तक कई बड़े अभिनेताओं, नेताओं तथा फिल्म निर्देशकों द्वारा किये गये शारीरिक शोषण के विरुद्ध महिलाएं आवाज़ उठा रहीं हैं।

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