करेंट अफेयर्स - जून, 2019

कारगिल युद्ध के 20 वर्ष : ग्वालियर एयर बेस में वायुसेना द्वारा समारोह का आयोजन किया गया

भारतीय वायुसेना ने कारगिल युद्ध (मई-जुलाई, 1999) की 20वीं सालगिरह ग्वालियर के एयर बेस में मनाई, इस दौरान टाइगर हिल अटैक जैसी कई महत्वपूर्ण घटनाओं का नाट्यरूपांतरण किया गया। इस इवेंट में एयर चीफ बी.एस. धनोआ मुख्य अतिथि थे।

नोट : कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई को मनाया जाता है।

पृष्ठभूमि

फरवरी, 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर में शान्ति के लिए लाहौर समझौता हुआ था। इसी दौरान कुछ पाकिस्तानी घुसपैठिये भारतीय सीमा में प्रवेश कर गये, घुसपैठ के कार्य को ‘ऑपरेशन बद्र’ नाम दिया गया था। पाकिस्तानी घुसपैठ का उद्देश्य कश्मीर और लद्दाख के बीच के संपर्क को काटना था, जिससे भारतीय सेना को सियाचीन ग्लेशियर से वापस हटना पड़े। इन घुसपैठियों ने योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया। इस घुसपैठ का दायरा 130 से 200 वर्ग किलोमीटर था।

इस गंभीर सकंट से निपटने के लिए भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन विजय’ लांच किया और इस कार्य के लिए 2,00,000 सैनिकों को भेजा गया। 60 दिन तक चले इस ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना ने अपने क्षेत्र पर पुनः नियंत्रण स्थापित कर लिया। यह ऑपरेशन 26 जुलाई, 1999 को पूरा हुआ। इस दौरान भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए। इस युद्ध में लगभग 450 पाकिस्तानी घुसपैठियों की मृत्यु हुई थी।

टाइमलाइन

4 मई, 1999 : पाकिस्तानी घुसपैठिये कारगिल को चोटी पर देखे गए

5-15 मई, 1999 : क्षेत्र का मुआयना करने गए कैप्टेन सौरभ कालिया का पाकिस्तान सैनकों ने अपहरण किया, प्रताड़ित करने के बाद उनकी हत्या की गयी।

26 मई, 1999 : MiG 21, MiG 27, जैगुआर और मिराज 2000 द्वारा घुसपैठियों पर हमले किये गये।

15 जून, 1999 : तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को कारगिल से अपने सैनिक वापस हटाने के लिए कहा।

29 जून, 1999  : भारतीय सेना ने टाइगर हिल के निकट दो महत्वपूर्ण स्थानों पर नियंत्रण स्थापित किया।

4 जुलाई, 1999 : आर्टिलरी का उपयोग, टाइगर पर विजय।

5 जुलाई, 1999 : पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कारगिल से सैनिकों की वापसी की घोषणा की।

11 जुलाई, 1999 : पाकिस्तानी सैनिकों की वापसी शुरू।

26 जुलाई, 1999 : सभी पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल से खदेड़ दिया गया।

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अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति का मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड में खोला गया

ओलिंपिक खेलों की 125वीं वर्षगाँठ के अवसर पर स्विट्ज़रलैंड के लौसेन में अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के नए मुख्यालय का उद्घाटन किया गया।

मुख्य बिंदु

अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति की स्थापना पिएरे डी कोउबेर्तिन द्वारा की गयी थी। इसका उद्देश्य विश्व भर में शांतिपूर्ण प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना था। ओलिंपिक खेल विश्व शान्ति तथा आशा का सूचक है।

ओलिंपिक हाउस का निर्माण पूर्व ओलिंपिक मुख्यालय के स्थान पर किया गया है, इसमें 95% मटेरियल का पुनरुपयोग किया गया है। इस भवन में उर्जा के लिए नवीकरणीय उर्जा के लिए सौर उर्जा का उपयोग किया गया है। इस भवन का निर्माण 145 मिलियन डॉलर की लागत से किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति

यह एक गैर-सरकारी खेल संस्था है, इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के लौसेन में स्थित है। इसकी स्थापना पिएरे डी कोउबेर्तिन तथा देमेत्रिउस विकेलास ने 23 जून, 1894 को फ्रांस के पेरिस में की गयी थी। यह संस्था ग्रीष्मकालीन तथा शीतकालीन ओलिंपिक खेलों का आयोजन करती है। अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति में 206 राष्ट्रीय ओलिंपिक समितियां सदस्य के रूप से शामिल हैं। इसके मौजूदा अध्यक्ष जर्मनी के थॉमस बाक हैं।

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