करेंट अफेयर्स - जून, 2019

“ए प्राइममिनिस्टर टू रीमेम्बर” पुस्तक का विमोचन किया गया

“ए प्राइममिनिस्टर टू रीमेम्बर: मेमोरीज ऑफ़ ए मिलिट्री चीफ” नामक पुस्तक का हाल ही में विमोचन किया गया, इस पुस्तक को नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल सुशील कुमार द्वारा लिखा गया है। यह पुस्तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा लिए गये प्रमुख रक्षा निर्णयों पर आधारित है। एडमिरल सुशील कुमार 1998 से 2001 के बीच नौसेना प्रमुख रहे।

मुख्य बिंदु

एडमिरल सुशील कुमार द्वारा लिखित पुस्तक के अनुसार 1999 की कारगिल की लड़ाई श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे उत्कृष्ठ उपलब्धियों में से एक थी। उन्होंने सामरिक नुकसान को बेहतरीन विजय में परिवर्तित का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को दिया है। श्री वाजपेयी ने सेना को LoC पार न करने का निर्देश दिया था, उन्होंने पाकिस्तानी घुसपैठियों को अपने क्षेत्र से बाहर करने के लिए कहा था।

इस पुस्तक में कहा गया है कि भारतीय संसद पर हुए हमले (13 दिसम्बर, 2001) के बाद श्री वाजपेयी पाकिस्तानी सेना के कैंप को नष्ट करना चाहते थे, परन्तु बाद में किन्ही कारणों से उन्हें इस योजना को टालना पड़ा।

एडमिरल सुशील कुमार के अनुसार तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह 9/11 हमले के बाद अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान पर युद्ध में अमेरिका को समर्थन देना चाहते थे, परन्तु सैन्य प्रमुख इस पर सहमत नहीं थे, श्री वाजपेयी ने सैन्य प्रमुखों के निर्णय का समर्थन किया था।

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लोकसभा ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने के लिए आगे बढ़ाने के लिए मंज़ूरी दी

लोकसभा ने संविधान के अनुच्छेद 356(4) के तहत जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने तक बढ़ाने के लिए मंज़ूरी दे दी है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में 2 जुलाई, 2019 को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त हो रही है। अब 3 जुलाई, 2019 से राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने के लिए बढ़ जायेगी।

पृष्ठभूमि

जून 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस लिया था, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी सरकार गिर गयी थी। इसके बाद राज्य में राज्यपाल शासन लागू हुआ था। 1996 के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है।

चूंकि जम्मू-कश्मीर का संविधान अलग है, इसलिए जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 92 के अनुसार राज्य की वैधानिक मशीनरी कार्यशील न होने के कारण 6 महीने तक राज्यपाल शासन लागू होता है। 6 महीने तक राज्यपाल शासन के बाद जम्मू-कश्मीर के संविधान में इसे आगे बढ़ाने की कोई और व्यवस्था नही है, इसलिए राज्यपाल शासन की अवधि समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागु किया गया।

चुनाव आयोग ने अपने वक्तव्य में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत इस वर्ष जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाया जायेंगे। इसके लिए तिथियों की घोषणा अगस्त, 2019 में अमरनाथ यात्रा के समापन के बाद की जायेगी। चुनाव आयोग जम्मू-कश्मीर के हालात पर लगातार नज़र बनाये हुए है।

राष्ट्रपति शासन

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार यदि किसी राज्य में सरकार संविधान के मुताबिक नहीं चलाई जा रही है तो राष्ट्रपति उक्त राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकते हैं। यह निर्णय राज्य में संवैधानिक मशीनरी फेल होने के परिणामस्वरूप लिया जाता है। राष्ट्रपति शासन एक समय में 6 महीने के लिए लगाया जा सकता है, बाद में लोकसभा व राज्यसभा की सहमती से इस अवधि को अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

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