करेंट अफेयर्स - जून, 2019

1 जुलाई से शुरू होगी चुनावी बांड की बिक्री

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने हाल ही में चुनावी बांड की 11वीं बिक्री की घोषणा 1 से 10 जुलाई के बीच किये जाने की घोषणा की। यह 17वीं लोकसभा के चुनाव की जाने वाली चुनावी बांड की पहली बिक्री है।

चुनावी बांड क्या है?

चुनावी बांड प्रामिसरी नोट की तरह है जिसका भुगतान धारक को किया जाता है, यह ब्याज मुक्त होता है। इसे भारत के किसी भी नागरिक अथवा भारत में गठित किसी संस्था द्वारा खरीदा जा सकता है।

चुनावी बांड के लाभ

  • राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता
  • राजनीतिक चंदा देने वाले लोगों की उत्पीड़न से रक्षा
  • तीसरे पक्ष को सूचना का खुलासा नहीं
  • राजनीतिक चंदे को कर के दायरे में लाना

चुनावी बांड योजना 2018

इस योजना के अनुसार जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत पंजीकृत राजनीतिक दल जिसे पिछले चुनावों में कम से कम 1% वोट प्राप्त हुए हों, वह दल चुनावी बांड्स प्राप्त कर सकता है। चुनावी बांड केवल भारतीय नागरिक द्वारा की खरीदे जा सकते हैं, यह बांड अकेले अथवा किसी के साथ मिलकर संयुक्त रूप से भी खरीदे जा सकते हैं। राजनीतिक दल द्वारा इन चुनावी बांड्स को केवल औथोराइज्ड बैंक में मौजूद खाते में ही एनकैश किया जा सकता है। यह चुनावी बांड जारी करने के 15 कैलेंडर दिवस तक मान्य होते हैं, वैधता की अवधि समाप्त हो जाने के बाद चुनावी बांड से राजनीतिक दल को भुगतान नहीं किया जा सकेगा। इन बांड्स को 1000, 10000, 1 लाख, 10 लाख तथा 1 करोड़ रुपये की राशि के रूप में जारी किया जाता है। नकद राजनीतिक चंदे की अधिकतम सीमा 2000 रुपये निश्चित की गयी है, इससे अधिक की राशि को चुनावी बांड के द्वारा ही देना होगा।

Categories:

Month:

Tags: , , , ,

संसद ने पारित किया विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) बिल, 2019

संसद ने हाल ही में विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) बिल, 2019 को पारित किया, इसके द्वारा ट्रस्टों को विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में इकाई स्थापित करने की अनुमति प्रदान की गयी। यह 17वीं लोकसभा द्वारा पारित किया जाने वाला पहला कानून था। इस विधेयक ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) अध्यादेश 2019 का स्थान लिया है, इस अध्यादेश को मार्च, 2019 में लागू किया गया था। इस विधेयक के द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 में संशोधन किया गया है।

मुख्य बिंदु

इस विधेयक में विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 के सेक्शन 2 (v) में “व्यक्ति” की परिभाषा में संशोधन किया गया है, इसमें “ट्रस्ट” को भी शामिल किया गया है। ट्रस्ट के अलावा उन इकाइयों को भी शामिल किया गया है जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जा सकता है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 के सेक्शन 2 (v) के अनुसार किसी “व्यक्ति” द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकता है। इस अधिनियम में “व्यक्ति” को भारत के निवासी अथवा अप्रवासी, हिन्दू अविभाजित परिवार, कोआपरेटिव सोसाइटी, कंपनी, फर्म इत्यादि को शामिल किया गया है।

Categories:

Month:

Tags: , , ,

Advertisement