करेंट अफेयर्स - जून, 2019

सिस्टर सिटी पार्टनरशिप : अहमदाबाद तथा कोबे के बीच LoI का आदान-प्रदान किया गया

अहमदाबाद तथा कोबे (जापान का शहर) के बीच सिस्टर सिटी पार्टनरशिप के लिए LoI (लैटर ऑफ़ इंटेंट) का आदान-प्रदान किया गया। इससे दोनों शहरों के बीच आर्थिक व सांस्कृतिक सम्बन्ध मज़बूत होंगे। यह आदान-प्रदान भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थति में किया गया, श्री मोदी ने कोबे में भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित किया।

सिस्टर सिटी क्या है?

यह दो देशों, शहरों, प्रान्तों अथवा क्षेत्रों के बीच एक कानूनी व सामाजिक समझौता होता है, इसका उद्देश्य सांस्कृतिक तथा व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देना होता है। यह योजना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए शुरू की गयी थी। कूटनीति में सिस्टर सिटी के कांसेप्ट को दो देशों के बीच सामरिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत ने अब तक चीन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, रूस, कनाडा, जर्मनी, बेलारूस, मॉरिशस, हंगरी, जॉर्डन, बांग्लादेश, लिथुआनिया तथा पुर्तगाल के साथ सिस्टर सिटी समझौते किये हैं।

पृष्ठभूमि

नवम्बर, 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने गुजरात तथा जापान के हयोगो प्रीफेक्चर के लिए सिस्टर स्टेट समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।  कोबे, हयोगो की राजधानी है। उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कोबे में बुलेट ट्रेन प्लांट की यात्रा भी की थी। उस समझौते का उद्देश्य गुजरात तथा हयोगो के बीच शिक्षा, संस्कृति, व्यापार, पर्यावरण सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना था।

भारत-जापान सम्बन्ध

भारत और जापान विभिन्न क्षेत्रों तथा परियोजनाओं में मिलकर कार्य कर रहे हैं। भारतीय मूल के काफी लोग जापान में कार्य करते हैं। भारत और जापान कार से लेकर बुलेट ट्रेन मिलकर बनाने जा रहे हैं।

गौरतलब है कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच जापान की सहायता से चलायी जाएगी। इस महत्वकांक्षी परियोजना का पहला हिस्सा 2022 में पूरा हो जायेगा।

 

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भारत ने विश्व बैंक के साथ के टीबी के उन्मूलन के लिए 400 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये

भारत ने विश्व बैंक के साथ के टीबी के उन्मूलन के लिए 400 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये। गौरतलब है कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख लोग टीबी के कारण मर जाते हैं। भारत ने 2025 तक टीबी को देश से समाप्त करने का महत्वकांक्षी लक्ष्य रखा है। 400 मिलियन डॉलर के इस ऋण की परिपक्वता अवधि 19 वर्ष है, जबकि छूट अवधि 5 वर्ष है।

टीबी रोग

टीबी रोग को तपेदिक, क्षय जैसे कई नामों से जाना जाता है। तपेदिक संक्रामक रोग होता है जो माइकोबैक्टिरीअम टूबर्क्यूलोसस (mycobacterium tuberculosis) नामक जीवाणु के कारण होता है। मूल लक्षणों में खाँसी का तीन हफ़्तों से ज़्यादा रहना, थूक का रंग बदल जाना या उसमें रक्त की आभा नजर आना, बुखार, थकान, सीने में दर्द, भूख कम लगना, साँस लेते वक्त या खाँसते वक्त दर्द का अनुभव होना आदि। इस बीमारी से टीकाकरण या साफ सफाई रखने से बचा जा सकता है। यक्षमा के रोगी का इलाज संभव है लेकिन इसका इलाज पूरी तरह से करना चाहिए, आधा करके नहीं छोड़ना चाहिए, वरना ये रोग जानलेवा भी हो सकता है।

तपेदिक रोग होने के कारण

तपेदिक या टीबी कोई आनुवांशिक रोग नहीं है। यह किसी को भी हो सकता है। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति तपेदिक रोगी के पास जाता है और उसके खाँसने, छींकने से जो जीवाणु हवा में फैल जाते हैं उसको स्वस्थ व्यक्ति साँस के द्वारा ग्रहण कर लेता है। इसके अलावा जो लोग अत्यधिक मात्रा में ध्रूमपान या शराब का सेवन करते हैं, उनमें इस रोग के होने की संभावना ज़्यादा होती है। इस रोग से बचने के लिए साफ-सफाई रखना और हाइजिन का ख्याल रखना बहुत ज़रूरी होता है।

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