करेंट अफेयर्स - जून, 2019

पद्मनाभ आचार्य बने मणिपुर के राज्यपाल

पद्मनाभ आचार्य ने हाल ही में मणिपुर के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली है। उन्हें मणिपुर के उच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायधीश जस्टिस लानुशुंगकम जमीर ने शपथ दिलाई। इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह तथा अन्य मंत्री मौजूद रहे। नागालैंड के गवर्नर पद्मनाभ आचार्य मणिपुर की गवर्नर नजमा हेपतुल्लाह की अनुपस्थिति में मणिपुर के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे।

पद्मनाभ आचार्य

पद्मनाभ आचार्य एक भारतीय राजनेता हैं, वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। आचार्य 14 जुलाई, 2014 से नागालैंड के राज्यपाल हैं। 12 दिसम्बर, 2014 से 17 अगस्त, 2016 के बीच वे श्री आचार्य ने असम के राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) भी रहे। वे 21 जुलाई, 2014 से 19 मई, 2015 के बीच त्रिपुरा के राज्यपाल रहे।

मणिपुर

  • मणिपुर भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित राज्य है। मणिपुर की राजधानी इम्फाल में स्थित है।
  • इसका गठन 21 जनवरी, 1972 को किया गया था।
  • मणिपुर की विधानसभा में 60 सीटें हैं।
  • मणिपुर के मौजूदा मुख्यमंत्री श्री एन. बीरेन सिंह हैं।
  • मणिपुर में लोकसभा की 2 तथा राज्यसभा को 1 सीट है।
  • मणिपुर का क्षेत्रफल 22,327 वर्ग किलोमीटर है।
  • मणिपुर का जनसँख्या  घनत्व 130 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

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मराठा आरक्षण वैध, परन्तु इसे कम किये जाए : बॉम्बे उच्च न्यायालय

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सरकारी नौकरियों तथा शिक्षण संस्थानों में मराठा समुदाय को दिए जाने वाले आरक्षण को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है, परनुत उच्च न्यायालय ने कोटा के प्रतिशत को 16% से कम करके 12-13% करने का सुझाव दिया है।

मुख्य बिंदु

बॉम्बे उच्च न्यायालय के अनुसार राज्य सरकार के पास सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े समुदाय का निर्माण करने तथा उसे आरक्षण प्रदान करने की वैधानिक शक्ति है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में 16% आरक्षण दिए जाने के विरुद्ध न्यायालय में याचिका दायर की गयी थी।

पृष्ठभूमि

30 नवम्बर, 2018 को बड़े स्तर पर मराठा समुदाय द्वारा किये गये प्रदर्शन के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षण संस्थानों में 16% आरक्षण देने का निर्णय लिया था। राज्य सरकार द्वारा मराठा समुदाय को सामजिक व आर्थिक पिछड़ा वर्ग घोषित किया गया था।

याचिका

महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध कई याचिकाएं दायर की गयी थीं। याचिकाकर्ताओं का मत है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार किसी भी राज्य में आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए। महाराष्ट्र में पहले से 52% आरक्षण है, इसमें यदि मराठा आरक्षण को जोड़ा जाये तो राज्य में आरक्षण 68% हो जायेगा।

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