करेंट अफेयर्स - मार्च, 2018

संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम उत्तर प्रदेश में पारित

राज्य विधानसभा में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की तर्ज पर माफिया और संगठित अपराध से निपटने के कड़े प्रावधान वाला उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2017 (यूपीकोका) पेश किया गया। आतंक फैलाने, बलपूर्वक या हिंसा द्वारा सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयास करने वालों से सख्ती से निपटने की यह विधेयक व्यवस्था प्रदान करता है। राज्यपाल और केंद्र की अनुमति मिलते ही यह कानून प्रभावी हो जाएगा।

पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री योगी द्वारा विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक , 2017 को पेश करते हुए बताया गया कि 21 दिसंबर, 2017 को विधानसभा में पारित होने के पश्चात् स्वीकृति के लिये विधेयक को विधानपरिषद के पास भेजा गया। परंतु, बिना किसी संशोधन के इसे अस्वीकार कर दिया गया।

प्रमुख विशेषताएँ

-विधेयक के उद्देश्य और कारणों में स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा कानूनी ढाँचा संगठित अपराध के खतरे के निवारण एवं नियंत्रण में अपर्याप्त पाया गया है।
-इसी कारण से संगठित अपराध के खतरे को नियंत्रित करने के लिये रिमांड की प्रक्रिया, संपत्ति की कुर्की, अपराध नियंत्रण प्रक्रिया, त्वरित विचार एवं न्याय के उद्देश्य के साथ यह विधेयक लाया गया है।
-विशेष न्यायालयों के गठन और विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की भी विधेयक में व्यवस्था की गई है।
-अपराध के खतरे को नियंत्रित करने हेतु इसके अंतर्गत संगठित आवश्यक अनुसंधान संबंधी प्रक्रियाओं को कड़े एवं निवारक प्रावधानों के साथ लागू करने के लिये विशेष कानून अधिनियमित करने का भी निश्चय किया गया है।
-संगठित अपराध के लिये विधेयक में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।
-आतंक फैलाने या बलपूर्वक, हिंसा द्वारा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिये विस्फोटकों या अन्य हिंसात्मक साधनों का प्रयोग कर किसी की जान या संपत्ति को नष्ट करने या राष्ट्र विरोधी, अन्य लोक प्राधिकारी को मौत की धमकी देकर या बर्बाद कर देने की धमकी देकर फिरौती के लिये बाध्य करने को लेकर इसके तहत कड़े प्रावधान किये गए हैं।
-अभी तक होता था कि पुलिस सबसे पहले किसी अपराधी को पकड़कर उसे कोर्ट में पेश करती था, फिर सबूत जुटाती थी। लेकिन उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक के तहत सबसे पहले पुलिस अपराधियों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करेगी, फिर उन सबूतों के आधार पर ही गिरफ्तारी होगी। अर्थात् अब अपराधी को कोर्ट में ही अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी।
-उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक की सबसे खास बात यह है कि इसमें गवाहों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है।
-उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक के तहत अब आरोपी यह नहीं जान पायेंगे कि उनके खिलाफ किसने गवाही दी है। सभी बातों को पूर्ण रूप से गोपनीय रखा जाएगा।

संगठित अपराध

उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक में संगठित अपराध को विस्तार से परिभाषित किया गया है। सरकारी ठेके में शक्ति प्रदर्शन, फिरौती के लिये अपहरण,खाली या विवादित सरकारी भूमि अथवा भवन पर जाली दस्तावेज़ें के ज़रिये या बलपूर्वक कब्जे, बाज़ार और फुटपाथ विक्रेताओं से अवैध वसूली, धमकी या वन्यजीव व्यापार, धन की हेराफेरी, मानव तस्करी, शक्ति का प्रयोग कर अवैध खनन,नकली दवाओं या अवैध शराब के कारोबार, मादक द्रव्यों की तस्करी आदि को इसके अंतर्गत शामिल किया गया है।

सज़ा

संगठित अपराध के परिणामस्वरुप विधेयक के अंतर्गत किसी की मौत होने की स्थिति में मृत्युदंड या आजीवन कारावास की व्यवस्था की गई है। न्यूनतम 25 लाख रुपए के अर्थदंड का भी प्रावधान किया गया है।
कम-से-कम 7 साल के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तथा न्यूनतम 15 लाख रुपए के अर्थदंड का प्रावधान किसी अन्य मामले में किया गया है।

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इसरो द्वारा जीएसएलवी-एफ 08 के ज़रिये जीएसएटी-6ए संचार उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रमोचन किया गया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा 29 मार्च, 2018 को भारत के भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी जीएसएलवी-एफ 08 के ज़रिये जीएसएटी-6ए संचार उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रमोचन किया गया। यह जीएसएलवी की बारहवीं उड़ान थी। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसे प्रक्षेपित किया गया।

प्रमुख विशेषताएँ

-स्वदेश विकसित क्रायोजेनिक इंजन इस प्रक्षेपण यान के तीसरे चरण में लगा है।
-हाई थ्रस्ट विकास इंजन यान के दूसरे चरण में लगा है। इसके अलावा, इस यान के दूसरे चरण में इलेक्ट्रो हाइड्रो एक्यूटेशन सिस्टम के बजाय इलेक्ट्रो केमिकल ऑटोमेशन का इस्तेमाल किया गया है।
-अंतरिक्ष यान की लंबाई 49.1 मीटर है। इसका वज़न 2,140 किलोग्राम है।
-इसरो द्वारा निर्मित यह मल्टी बीम कवरेज के माध्यम से मोबाइल संचार सेवाएँ प्रदान करने के लिये एक संचार उपग्रह है। इस सुविधा के बल पर इससे नेटवर्क मैनेज़मेंट तकनीक में मदद मिलेगी।
-यह एस और सी-बैंड ट्रांसपोंडर से लैस है। इससे सैन्य बलों को उनके ऑपरेशन में बहुत सहायता मिलेगी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए। 80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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