करेंट अफेयर्स - मार्च, 2018

कैबिनेट ने 2021 तक अफ्रीका में 18 नए मिशन खोलने को मंजूरी दी |

केंद्रीय कैबिनेट ने 2018 से 2021 तक चार साल की अवधि में अफ्रीका में 18 नए भारतीय मिशन खोलने की मंजूरी दे दी है। इस संबंध में निर्णय नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया ।

मुख्य तथ्य

अफ्रीका में 18 नए भारतीय मिशन केप वर्डे, चाड, बुर्किना फासो, कैमरून, कांगो गणराज्य, जिबूती, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, गिनी बिसाऊ, गिनी, लाइबेरिया, मॉरिटानिया, रवांडा, साओ टोम और प्रिंसिपे, सोमालिया. सिएरा लियोन, स्वाज़ीलैंड और टोगो में खोले जाएंगे, इससे अफ्रीका में भारतीय निवासी मिशनों की संख्या 29 से बढ़कर 47 हो जाएगी।

महत्व

यह निर्णय भारत के राजनयिक आउटरीच को बढ़ाएगा और संसाधन संपन्न अफ़्रीकी महाद्वीप में भारत को स्थापित कर देगा। यह भारत को अफ्रीकी देशों में भारतीय डायस्पोरा को शामिल करने में मदद करेगा । यह अफ्रीका के साथ उन्नत सहयोग लागू करने के लिए सकारात्मक कदम के रूप में भी काम करेगा | यह भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन (आईएएफएस-तृतीय) की प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिए सहयोग को भी बढ़ाएगा।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरोगैसी (विनियमन) विधेयक, 2016 में सरकारी संशोधनों के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दी |

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरोगैसी (विनियमन) विधेयक, 2016 में सरकारी संशोधनों के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एक बार संसद द्वारा अधिनियमित किए जाने के बाद, राष्ट्रीय सरोगैसी बोर्ड (एनएसबी) का केंद्रीय स्तर पर गठन किया जाएगा राज्य सरकार / केंद्र शासित प्रदेश राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के 3 महीने के भीतर राज्य सरोगैसी बोर्ड (एसएसबी) उपयुक्त प्राधिकरणों का गठन करेगा।

सरोगेसी क्या है ?

यह एक महिला और एक दंपति के बीच का एक एग्रीमेंट है, जो अपना खुद का बच्चा चाहता है। सामान्य शब्दों में इसका मतलब है कि बच्चे के जन्म तक महिला की ‘किराए की कोख’ का उपयोग । सरोगेसी की मदद तब ली जाती है जब किसी दंपति को बच्चे को जन्म् देने में कठिनाई आ रही हो। बार-बार गर्भपात हो रहा हो या फिर बार-बार आईवीएफ तकनीक फेल हो रही है, जो महिला किसी और दंपति के बच्चे को अपनी कोख से जन्मी देने को तैयार हो जाती है उसे ‘सरोगेट मदर’ कहा जाता है।

पृष्ठभूमिः

भारत विभिन्न देशों की दंपतियों के लिए सरोगेसी केंद्र के तौर पर उभरा है और यहां अनैतिक गतिविधियों, सरोगेसी से पैदा हुए बच्चों को त्यागने .सरोगेट माताओं के शोषण और मानव भ्रूणों एवं युग्मकों की खरीद-बिक्री में विचैलिये के रैकेट से संबंधित घटनाओं की सूचनाएं मिली हैं। कुछ वर्षों से भारत में चल रही वाणिज्यिक सरोगेसी की व्यापक निंदा करते हुए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अभियान चलाया जा रहा है जिसमें वाणिज्यिक सरोगेसी पर रोक लगाने और नैतिक परोपकारी सरोगेसी को अनुमति दिए जाने की जरूरतों को उजागर किया गया है। विधि आयोग की 228 वीं रिपोर्ट में भी उपयुक्त कानून बनाकर वाणिज्यिक सरोगेसी पर रोक लगाने और जरूरतमंद भारतीय नागरिकों के लिए नैतिक परोपकारी सरोगेसी की अनुमति की सिफारिश की गई है।

सरोगैसी (विनियमन) विधेयक, 2016

यह विधेयक नवंबर 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे जनवरी 2017 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण की संसदीय स्थायी समिति के लिए भेजा गया था। समिति ने विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा तथा उनके सुझाव प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्तर पर बैठकें की थी।

विधेयक का महत्व

प्रस्तावित कानून देश में सरोगेट सेवा को विनियमित करेगा और सरोगेट में अनैतिक प्रथाओं को नियंत्रित करेगा। यह सरोगेट के व्यावसायीकरण को रोकने और सरोगेट के माध्यम से पैदा होने वाले किराए के बच्चों की माताओं के संभावित शोषण को प्रतिबंधित करेगा। यह मानव भ्रूण और जुर्माने की बिक्री और खरीद सहित वाणिज्यिक सरोगेट को प्रतिबंधित करेगा

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