करेंट अफेयर्स - मार्च, 2018

नीति आयोग द्वारा जारी सूची में नूहं देश के सबसे पिछड़े ज़िले के रूप में सूचीबद्ध किया गया

नीति आयोग द्वारा एक सूची जारी की गई है जिसमें विकास के नज़रिये से देश के सबसे पिछड़े ज़िलों का उल्लेख किया गया है। हरियाणा के नूहं (मेवात) को देश के सबसे पिछड़े ज़िले के रूप में इस सूची में सूचीबद्ध किया गया है।

मुख्य तथ्य

– तेलंगाना के आसिफाबाद, मध्य प्रदेश के सिंगरौली, नगालैंड के किफिरे और उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती ज़िले को देश के सबसे पिछड़े पाँच ज़िलों में इसके बाद शामिल किया गया है।
-आपसी प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाकर विकास के लिये इन ज़िलों को प्रोत्साहित करना इस रैंकिंग का उद्देश्य है।
-शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण, कृषि, जल संसाधन, आधारभूत बुनियादी ढाँचे वित्तीय समावेशन तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्रों के 49 विकास मानकों के आधार पर देश के 101 पिछड़े ज़िलों की रैंकिंग आयोग द्वारा की गई। इन ज़िलों को ‘आकांक्षापूर्ण ज़िले’ नाम दिया गया।
-केंद्र एवं राज्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रभारी संयुक्त सचिव एवं अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को इन ज़िलों में नियुक्त किया गया।
-मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति राज्य स्तर पर की जाएगी।
-नीति आयोग द्वारा “चैम्पियंस ऑफ चेंज” नाम से एक ऑनलाइन डैशबोर्ड भी तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम से इन ज़िलों की रैंकिंग में आने वाले उतार-चढ़ाव के संबंध में ऑनलाइन रैंकिंग की जा सके।

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आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 2020 के लिये नई एकीकृ‍त शिक्षा योजना के प्रस्‍ताव को मंजूरी

01 अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2020 के लिये प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा नई एकीकृत शिक्षा योजना बनाने के स्‍कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी गई है। प्रस्‍तावित योजना में, राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए),सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) और शिक्षक शिक्षण अभियान को समाहित कर दिया गया है। 75 हज़ार करोड़ रुपए प्रस्‍तावित योजना के लिये मंजूर किये गए हैं। यह राशि मौजूदा आवंटित राशि से 20 प्रतिशत अधिक है।

प्रमुख विशेषताएँ

-प्रधानमंत्री के ‘सबको शिक्षा, अच्‍छी शिक्षा’ के विज़न के परिप्रेक्ष्‍य में प्रस्‍तावित योजना लाई गई है। पूरे देश में प्री-नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा सुविधा सबको उपलब्‍ध कराने के लिये राज्‍यों की सहायता करना इसका लक्ष्‍य है।
-शिक्षा के क्षेत्र में सतत् विकास के लक्ष्‍यों के अनुरूप नर्सरी से लेकर माध्‍यमिक स्‍तर तक सबके लिये समान रूप से समग्र और गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा सुनिश्‍चित करना इस योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य है। एकीकृत स्‍कूली शिक्षा योजना में शिक्षकों और प्रौद्योगिकी पर ध्‍यान केंद्रित करते हुए स्‍कूली शिक्षा की गुणवत्‍ता को सुधारने पर विशेष बल दिया गया है।

प्रभाव

-राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों को अपने उपलब्‍ध संसाधनों के हिसाब से अपनी प्राथमिकता तय करने और योजना के प्रावधान लागू करने का इस योजना से अवसर मिलेगा।
-स्‍कूली शिक्षा के विभिन्‍न चरणों में बच्‍चों के आगे शिक्षा ज़ारी रखने के मामलों में बढ़ोतरी होगी तथा बच्‍चों को अपनी स्‍कूली शिक्षा पूरी करने के लिये सार्वभौमिक रूप से मौका मिलेगा।
-बच्‍चों को गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा उपलब्‍ध कराने के साथ ही उन्‍हें विभिन्‍न तरह के कौशल और ज्ञान में दक्ष बनाना योजना का उद्देश्‍य है जो उनके सर्वांगीण विकास के साथ ही भविष्‍य में कार्यजगत में जाने और उच्‍च शिक्षा ग्रहण करने के लिये आवश्‍यक है।
-बजटीय आवंटन का बेहतर और मानव संसाधन तथा पूर्ववर्ती योजनाओं के लिये तैयार की गई संस्‍थागत संरचनाओं का प्रभावी इस्‍तेमाल योजना से हो सकेगा।

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